उफना रही घाघरा से गांजर में मुसीबत बढ़ती जा रही है। शनिवार रात घाघरा पचीसा गांव के 18 घर निगल गई। हालांकि कटान को देखते हुए परिवार पहले से ही घर छोड़कर सुरक्षित स्थान पर चले गए थे। टापू पर बसे परिवार प्रशासन पर राहत सामग्री बांटने में भेदभाव का आरोप लगा रहे हैं। उधर, बैराजों से ढाई लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिससे मुसीबत बढ़ सकती है।
इन दिनों टापू पर बसे पचीसा गांव पर घाघरा का कहर बरप रहा है। टापू का आधा हिस्सा बाढ़ की चपेट में है। जो बचा है, उसे नदी की तेज धार काट रही है। शनिवार की रात टापू पर बसे गोपाल, गोली राम, पुत्ती लाल, नंगूलाल, लालबिहारी, गोकरन, ताहिर, बच्चू लाल, तहसीलदार, फौजदार, हरेराम, ज्वाला प्रसाद, कैलाश, नरेश, उदयराज, समई, जंगू आदि के 18 घर कटकर नदी में समा गए।
पीड़ित परिवारों का कहना है कि कटान देखकर वे पहले ही घर छोड़ सुरक्षित स्थानों पर चले गए थे। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन यहां पर मदद के नाम पर भेदभाव कर रहा है। जो मदद आती है, वो प्रधान के करीबियों को ही दी जाती है। जबकि बहुत से परिवारों को अभी तक मदद नही मिल सकी है।
कोनी व गोड़ियनपुरवा गांवों में नदी तेजी से कटान कर रही है। जिसकी वजह से इन गांवों में बाढ़ में फंसे परिवार भयभीत हैं। ये परिवार चाह कर भी गांव से बाहर नही निकल सकते हैं। हालांकि इन गांवों में प्रशासन की तरफ पूड़ी के पैकेट पीड़ितों तक पहुंचाए जा रहे हैं। निर्मलपुरवा गांव को निगल चुकी नदी अब प्रमुख मार्ग पर सितम ढा रही है।
नदी के पार दुर्गा पुरवा है, यदि नदी ने सड़क काट दी, तो दुर्गा पुरवा में नदी कटान करने लगेगी। इससे यहां के लोग दहशत में हैं। क्षेत्र के जैतहिया, मरेली, रामलाल पुरवा, पासिनपुरवा, मरेली, ठेकेदार पुरवा, लोध पुरवा, बैरागीपुर, गार्गीपुर, परमेश्वरदीन पुरवा आदि गांवों के बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि अभी तक प्रशासन की तरफ कोई मदद गांव में नहीं पहुंची है। रामपुर मथुरा क्षेत्र में अंगरौरा, कनरखी, दुबे पुरवा, पंडित पुरवा, नया गांव आदि 48 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। इनमें कुछ परिवार निकल कर अंगरौरा बंधे पर पहुंचे हैं। जबकि अधिकांश परिवार बाढ़ का दंश झेल रहे हैं।
डेलिया संपर्क मार्ग पर पानी बहने लगा है। जिससे राजापुर कलां जाने वाले ग्रामीणों को निकलने में दिक्कते हो रही हैं। राजपुर कलां का गोड़ियनपुरवा मजरा बाढ़ के पानी से घिर से गया है। घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ता ही जा रहा है। उधर, शारदा व घाघरा बैराजों से 259937 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी सीतापुर पहुंचने पर बाढ़ के स्तर में और इजाफा करेगा।