सीतापुर। सरयू में उफान तो कम हुआ लेकिन लोगों की दुश्वारियों में नहीं। जलस्तर में कमी आने के बाद भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की मुश्किलें बरकरार हैं। रास्तों पर बाढ़ का पानी भरा होने से गुजरना कठिन है। सैकड़ों बीघा खेतों से लेकर करीब 45 गांवों के आसपास बाढ़ का पानी भरा होने से लोगों की दिनचर्या प्रभावित है। तीनों बैराजों से दो दिनों में 7.46 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
बीते दो दिनों में सरयू के जलस्तर में 30 सेंटीमीटर की कमी आई है। रविवार को नदी का जलस्तर 118.50 मीटर दर्ज किया गया था जोकि खतरे के निशान से पानी 50 सेमी नीचे रहा।
रामपुर मथुरा प्रतिनिधि के अनुसार तीनें बैराजों से शनिवार को 4.04 लाख जबकि रविवार को 3.41 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
सरयू का जलस्तर घटने से बाबाकुटी, प्यारेपुरवा, अखरी व अंगरौरा में भरा बाढ़ का पानी कम होने लगा है। टहलू, रामू, भजनी, फूलचंद, शंकर, मनीराम,कैलाश, गजराज, सत्यवान व कैलाश के घरों से पानी निकलना शुरू हो गया है। मनीराम व फूलचंद ने बताया कि पानी कम हुआ है, लेकिन अभी हालात जस के तस हैं।
कुर्बान अली ने बताया कि अंगरौरा में जो पानी सड़क पर बह रहा था वह आज बंद हो गया है। अंगरौरा के पिंटू, मिश्री व मुन्नू ने बताया कि नदी का पानी कम हो रहा है, किंतु रास्तों पर आवागमन खतरे से खाली नहीं है। खेतों और गांवों के आसपास पानी भरा होने से दिनचर्या सामान्य नहीं हो पा रही है।
बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि तहसील प्रशासन से अभी तक कोई सहायता भी नहीं मिली है। रेउसा प्रतिनिधि के अनुसार शारदा व सरयू का जलस्तर घटने से रास्तों पर भरा बाढ़ का पानी कम होने लगा है। इसके बाद भी रास्ते बाढ़ की चपेट में हैं। गुरगुजपुर के पास नकहिया पुलिया पर और रास्ते पर अब भी बाढ़ का पानी डरा रहा है। रास्ते के दोनों तरफ लगाए गए संकेतक भी कई जगह से उखड़ कर बह गए हैं।
खेतों में पानी भरा होने से रविवार को तेज धूप के कारण फसल सड़ने का खतरा बढ़ गया है। तटवर्ती गांवों के लोग अभी बाढ़ का खतरा टलने को लेकर असमंजस में हैं। लोगों का कहना है कि बैराजों से ज्यादा पानी छोड़े जाने से हालात फिर खराब हो सकते हैं।