सीतापुर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग जनता के लिए न्याय का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। हालांकि, उपभोक्ताओं का एक बड़ा वर्ग अब भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं है। आयोग के अध्यक्ष अभिमन्यु लाल श्रीवास्तव ने बताया कि यदि किसी उपभोक्ता के साथ धोखाधड़ी होती है या कंपनी अपनी शर्तों का पालन नहीं करती, तो वे आयोग में वाद दायर कर न्याय पा सकते हैं।
बिसवां के कमलेश ने अपनी पत्नी का बीमा स्टार यूनियन द ईची लाइफ इंश्योरेंस से कराया था। पत्नी की आकस्मिक मृत्यु के बाद कंपनी के अधिकारी 2 लाख रुपये की बीमित राशि देने के बजाय उन्हें लगातार दौड़ाते रहे। कमलेश ने वर्ष 2024 में आयोग में परिवाद दायर किया। आयोग की सख्ती के बाद 13 दिसंबर को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में कंपनी के अधिकारी न केवल 2 लाख रुपये देने पर सहमत हुए, बल्कि उन्हें पीड़ित को 20 हजार रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में भी देने होंगे।
बरसोहिया निवासी देशराज ने बजाज ऑटो और मूसाराम भगवान दास इंटरप्राइजेज के विरुद्ध परिवाद दर्ज कराया था। देशराज ने अपनी बाइक की मरम्मत पर 30 हजार रुपये खर्च किए थे, लेकिन खराबी फिर से आ गई। जब कंपनी ने पैसे लौटाने से मना किया तो उन्होंने आयोग की शरण ली। आयोग के कड़े रुख के बाद विपक्षी कंपनी ने देशराज के साथ समझौता कर लिया।
वहीं घूरामऊ निवासी अभिषेक उप्रेती ने अपने पिता के ड्राइविंग लाइसेंस में नाम की त्रुटि सुधारने के लिए एआरटीओ कार्यालय के चक्कर काटे, लेकिन लंबी प्रक्रिया का हवाला देकर उन्हें परेशान किया गया। उपभोक्ता आयोग में मामला पहुंचते ही सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी ने बिना किसी अतिरिक्त शुल्क या लंबी प्रक्रिया के त्रुटि को तत्काल सुधार दिया।
चक्कर कटवाने वाले बैंक पर आयोग का कड़ा रुख, भुगतान के निर्देश
लहरपुर के रायपुरगंज निवासी अवधेश कुमार अवस्थी ने जिला सहकारी बैंक में अपनी एक एफडीआर जमा की थी। परिपक्वता अवधि पूरी होने के बाद जब उन्होंने बैंक से भुगतान का अनुरोध किया, तो अधिकारियों ने उन्हें टालना शुरू कर दिया। बैंक के चक्कर काटकर परेशान होने के बाद अवधेश ने उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया।
यह मामला राष्ट्रीय लोक अदालत पहुंचा, जहां आयोग के कड़े रुख और निर्देशों के बाद बैंक प्रबंधन अवधेश के साथ समझौता करने पर सहमत हुआ। जिला सहकारी बैंक के अधिकारियों ने उन्हें कुल 8,02,646 रुपये की धनराशि लौटाने की सहमति दी। बैंक की वर्तमान वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए, आयोग ने यह धनराशि तीन किस्तों में अदा करने का निर्देश दिया है।
सुलभ न्याय, डालसा का विशेष अभियान
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) द्वारा उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति निरंतर जागरूक किया जा रहा है। प्राधिकरण के पीएलवी (पैरा लीगल वॉलंटियर्स) क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान जनमानस को उपभोक्ता आयोग की कार्यप्रणाली और वाद दायर करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हैं। हमारा प्रयास रहता है कि शोषण के शिकार प्रत्येक उपभोक्ता को सुलभ न्याय मिले। इसी क्रम में, राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से भी हम ऐसे विवादों के त्वरित और प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण का निरंतर प्रयास करते हैं।
- नरेंद्र नाथ त्रिपाठी, अपर जिला जज व सचिव डालसा