महोली (सीतापुर)। ब्लॉक के ग्राम पंचायत बहेरा में 1.82 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुई जल जीवन मिशन योजना अधर में है। इस वजह से ग्रामीण शुद्ध पेयजल को तरस रहे हैं। योजना के तहत पांच वर्ष पहले पानी की टंकी का निर्माण शुरू किया था, जो अभी अधूरा है। पानी की टंकी ढांचा ग्रामीणों की प्यास बुझाने के बजाय उनको मुंह चिढ़ा रहा है। गांव में पाइप डालने के लिए खोदे गए रास्तों का हाल बदहाल है।
शुद्ध पेयजल की बाट जोह रहे ढाई हजार लोग
ग्राम पंचायत बहेरा व उसके मजरा पुरवा की जनसंख्या तकरीबन 2500 है। 182 लाख की लागत से जब जल जीवन मिशन के तहत कार्य शुरू हुआ तो ग्रामीणों को उम्मीद थी कि कुछ माह में उनके घरों में पेयजल उपलब्ध हो जाएगा, लेकिन पांच साल की अवधि में कार्यदायी संस्था एलएनटी द्वारा योजना के तहत गांव में पानी की टंकी का निर्माण भी पूरा नहीं कराया जा सका। पाइप लाइन डालने के लिए गांव के रास्तों की खोदाई की गई, इसके बाद रास्तों की मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति कर ली गई है।
ग्रामीण चंद्रिका प्रसाद व चतुरा ने बताया कि गांव में अधिकांश सड़कें आरसीसी की हैं। पाइप डालने के लिए सड़कों को खोद कर मरम्मत के नाम पर गिट्टी, मोरंग डालकर भर दिया गया। सड़कें ग्रामीणों को दर्द दे रही हैं। टंकी का निर्माण भी पूरा नहीं कराया गया। घरों में कनेक्शन दे दिए गए।
200 मीटर खडंजा भी हुआ बर्बाद
गांव में कल्लू के मकान से सामुदायिक भवन तक 100 मीटर खडंजा व भुइहारे बाबा स्थान से प्राथमिक विद्यालय तक 100 मीटर खड़ंजा खोदकर पाइप लाइन डाली गई, इसके बाद मरम्मत नहीं कराई गई। पैदल निकलना भी मुश्किल है। ग्रामीण क्षेत्रपाल, द्वारिका ने पहले पानी की टंकी बनाई गई, इसके बाद जांच में मानकविहीन होने से तोड़ दी गई। इन दिनों केवल ढांचा ही खड़ा है।
पाइप लाइन में लीकेज की समस्या
ग्रामीणों के मुताबिक मोटर चलाकर कभी-कभार पानी की सप्लाई दी जाती है। पाइपों में लीकेज होने से दूषित पानी घरों तक पहुंचता है। ग्रामीण सतीश, रामासरे, लक्ष्मण, रामपाल, श्री राम, मुकेश सतनू ने स्वच्छ जलापूर्ति किए जाने की मांग की है।