सकरन। ब्लॉक में तैनात एडीओ आईएसबी जितेंद्र कुमार रस्तोगी को सोमवार को ग्राम्य विकास आयुक्त ने निलंबित कर दिया है। उन पर सकरन ग्राम पंचायत के विकास कार्याें में गबन का आरोप था। इससे पूर्व डीएम डॉ राजा गणपति आर के निर्देश पर एडीओ पंचायत प्रेम प्रकाश चौधरी ने एफआईआर भी दर्ज कराई थी।
सकरन ब्लॉक की ग्राम पंचायत सकरन में हैंडपंप रिबोर, स्ट्रीट व सोलर लाइट तथा ह्यूमपाइप के नाम पर भ्रष्टाचार किया गया। इसकी शिकायत गांव के रामचंद्र यादव ने विभागीय अधिकारियों से की। कार्रवाई न होने पर रामचंद्र ने हाईकोर्ट में रिट दायर कर दी। इसके बाद 22 जून 2025 में जिले से आई तीन सदस्यीय टीम ने मामले की जांच की। इसमें बगैर कार्य कराए सरकारी धन निकाले जाने की पुष्टि हुई। जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए प्रधान के वित्तीय अधिकार सीज किए। साथ ही 48.54 लाख रुपये की रिकवरी व एफआईआर के आदेश दिए। इसमें प्रधान संतोषी देवी यादव पर 18,55,760 रुपये, तत्कालीन सचिव अर्पित गुप्ता पर 24,27,485 रुपये व प्रशासक जितेंद्र रस्तोगी (एडीओ आईएसबी) को 5,71,725 रुपये गबन करने का दोषी पाया गया था।
डीएम के निर्देश पर खंड विकास अधिकारी श्रीश कुमार गुप्ता ने एडीओ पंचायत प्रेम प्रकाश चौधरी को पत्र लिखकर दोषियों पर मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए थे। इस पर 24 जनवरी को एडीओ पंचायत ने सकरन थाने में तीनों लोगों के विरुद्ध तहरीर दी थी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर प्रधान, तत्कालीन सचिव व एडीओ आईएसबी के विरुद्ध बीएनएस की धारा 116 (5) के तहत अभियोग पंजीकृत कर लिया। खंड विकास अधिकारी श्रीश कुमार गुप्ता ने बताया कि डीएम के निर्देश पर दोषियों पर एफआईआर दर्ज कराई थी। रिकवरी के लिए विधिक प्रक्रिया अपनाई जा रही है।