सीतापुर। दिवाली पर जिले की आबोहवा बिगड़ गई। वायु प्रदूषण का स्तर दोगुना हो गया। जिले में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 60 से बढ़कर 130 पर पहुंच गया। इसके चलते दमा, सांस व एलर्जी के मरीजों की समस्या बढ़ गई। इन मरीजों ने जिला अस्पताल व निजी अस्पतालों में इलाज करवाया।
दिवाली पर लोगों ने जमकर आतिशबाजी का खूब आनंद लिया। वातावरण में बढ़ती नमी के साथ जिले की आबोहवा तेजी से बिगड़ गई। ऐसे में दमा रोगियों की परेशानी बढ़ गई। सरकारी-निजी अस्पतालों में सांस लेने, एलर्जी, आंखों में जलन और गले में खराश से जुड़े मरीजों आंकड़ा बढ़ गया। जिला अस्पताल की ओपीडी में इन बीमारियों के मरीज रोजाना की अपेक्षा अधिक पहुंचे थे।
आमतौर पर इन बीमारियों के करीब 200-300 मरीज पहुंचते थे। शनिवार को इस तरह के करीब 400 मरीज आए। इसके अलावा निजी चिकित्सालयों में भी काफी भीड़ रही। सीएमएस डॉ. इंदर सिंह ने बताया मरीज बढ़े जरूर थे। इन सभी को इलाज दिया गया।
यह है एक्यूआई का प्रतिशत
0 और 50 के बीच एक्यूआई को अच्छा
51 और 100 के बीच संतोषजनक
101 और 200 के बीच मध्यम
201 और 300 के बीच खराब
301 और 400 के बीच बेहद खराब
401 से 500 के बीच गंभीर श्रेणी
बाहर निकले तो लगाएं मास्क
जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. गौरव मिश्रा ने बताया कि प्रदूषण का स्तर जब बढ़ता है तो दमा व सांस रोगियों में इजाफा हो जाता है। यह प्रदूषण इन मरीजों के लिए काफी खतरनाक होता है। ऐसे मरीजों को बाहर निकलने से बचना चाहिए। अगर निकल रहे है तो मास्क का जरूर उपयोग करें। अपने चिकित्सक की परामर्श के अनुसार इलाज करवाएं।
देरी से पहुंचे मरीज लौटे वापस
जिला अस्पताल की ओपीडी शनिवार को 12 बजे तक हुई। इससे मरीजों को जल्द ओपीडी बनने की जानकारी नहीं थी। जब देरी से मरीज पहुंचे तो चिकित्सकों की कुर्सियां खाली मिलीं। इससे वह बिना इलाज कराएं ही वापस लौट गए। इन मरीजों ने प्राइवेट में इलाज करवाया।