सीतापुर। मानसून की पहली ही बरसात में पूरा शहर जलमग्न नजर आएगा। कारण, इस बार नाला सफाई का टेंडर नहीं हो सका है। केवल 10 लोगों की एक टीम बनाकर शहर भर के नाले साफ कराये जा रहे है। नगर पालिका का दावा तो अधिकांश नालों की सफाई होने का किया जा रहा है। जबकि हकीकत में कूड़ा करकट व सिल्ट से नाले भरे पड़े है।
शहर में जलनिकासी के लिए 48 छोटे बड़े नाले है। इनके जरिए पूरे शहर की जलनिकासी होती है। जून में मानसून आने की उम्मीद की जा रही थी। इस पर 20 जून तक नगर पालिका ने सभी नाला नालियों की साफ सफाई कराने का प्लान बनाया था। जबकि इससे पहले नगर पालिका की तरफ से नाला सफाई का टेंडर होना चाहिए था।
यह टेंडर ही नहीं हो सका। पांच-पांच लोगों की दो टीमें बनाई गई है। इन्हें ही नाला सफाई करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा लोगों की शिकायत पर उनकी नाला नालियां साफ करने भी जाती है। जेसीबी तो है लेकिन अधिकांश नाले छोटे बने हुए है। इन नालों की जेसीबी से सफाई करना मुश्किल होता है। इन हालातों में नाले कैसे साफ हो रहे है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
नगर पालिका का दावा है कि अधिकांश नाले साफ कर दिए गए है। हकीकत में इनकी सफाई नहीं दिखाई दे रही है। शहर के प्रमुख नालों में ऊपर तक गंदगी भरी हुई है। अगर किसी नाले की सफाई गई है तो केवल ऊपरी सतह से गंदगी हटा दी गई है। इस बार भी जब पहली बरसात होगी तो पूरा शहर जलनिकासी के संकट से परेशान दिखाई दिया। विकास, उदित व रमेश का कहना है कि अगर नगर पालिका ने समय से नालों की सफाई नहीं कराई तो घर के अंदर तक पानी भर जाएगा।
गंदगी से भरा है नाला
शहर के दरी मंडी में जलनिकासी के लिए नाला बना हुआ है। इस नाले से बाजार के आसपास इलाके की जलनिकासी होती है। अब बरसात शुरू होने वाली है लेकिन अभी तक नाले की सफाई नहीं हो सकी है। गंदगी से नाला बजबजा रहा है।
नहीं की गई सफाई
शहर के तामसेनगंज में भुजियाना में भी नाले की सफाई नहीं हुई है। लोगों का कहना है कि पिछले साल भी नाले की सही तरीके से सफाई नहीं कराई गई थी। बरसात आने वाली है, लेकिन अभी तक यह साफ नहीं हो सका है। पिछले साल की तरह इस साल भी जलभराव की समस्या आएगी।
जून बीतने को पर नहीं हो सकी सफाई
लोहारबाग में त्रिकोणनाथ मंदिर के पास निकले नाले से अंबेडकर, विजयलक्ष्मी नगर आदि मोहल्लों की जलनिकासी होती है। जून बीतने को है लेकिन अभी तक यह साफ नहीं हो सका है। जबकि नगर पालिका ने 20 जून तक शहर के सभी नालों की सफाई करने का प्लान तय किया था।
मैन पावर बढ़ाने की हुई थी मांग
नगर पालिका के सूत्रों का कहना है कि नाला सफाई को लेकर डीएम के सामने भी बात उठी थी। उस समय मैन पावर बढ़ाने की मांग हुई थी। कहा गया था कम से कम 400 लोगों को ठेके पर लेकर सफाई कराई जाए। तभी शहर के नाले साफ हो सकते है लेकिन नगर पालिका ने इसमें खेल कर दिया। एक भी मैन पावर नहीं बढ़ाई। नगर पालिका में पहले से तैनात कर्मचारियों को ही लगाकर सफाई करवाई जा रही है।
काम भी हो जाएगा और अंगुली भी नहीं उठेगी
अगर नगर पालिका सफाई का टेंडर करा देती तो उस कंपनी के पास मैन पावर से लेकर संसाधन तक हर समय उपलब्ध रहते। इससे पूरे शहर के नाले आसानी से साफ हो जाते है। लेकिन नगर पालिका ने टेंडर न देकर खुद ही कामचलाऊ तरीके से सफाई करवा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इसके पीछे कमीशनखोरी का खेल हो रहा है।
एक ही बरसात के बाद दिखा दिया जाएगा कि नाले साफ हो गये थे। बरसात के बाद फिर से सील्ट नाले में आकर जमा हो गई है। इससे नाला सफाई का पैसा भी खप जाएगा और किसी की अंगुली भी नहीं उठेगी।
शहर के नाला नालियों की सफाई कराई गई है। कुछ जगहों पर अतिक्रमण की दिक्कत आ रही है। वहां पर भी इसे हटवाकर साफ कराया जाएगा। नाला सफाई का चार बार टेंडर निकला है लेकिन किसी ने टेंडर को नहीं लिया है।
- वैभव त्रिपाठी, ईओ