फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुहागिनों ने किया वट वृक्ष का पूजन

विज्ञापन
होली नगर में वट वृक्ष की पूजा करती श्रद्धालु महिलाएं। (संवाद) - फोटो : SITAPUR
विज्ञापन
सीतापुर। प्रकृति ही सुखों का आधार है और प्रकृति से ही घर संसार है। गुरुवार को महिलाओं ने वट वृक्षों का श्रृंगार पूजन कर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। महिलाओं ने पति की दीर्घायु के लिए वटवृक्ष का पूजन अर्चन किया। प्रसाद में फलों और पकवानों का वितरण किया। वट सावित्री त्योहार की धूम शहर से लेकर गांव तक रही। दोपहर से सूर्यग्रहण लगने की वजह से महिलाओं ने अधिकतर स्थानों पर दोपहर 12 बजे तक पूजन-अर्चन पूरा कर लिया।
विज्ञापन

वट सावित्री पूजा को लेकर सुहागिनों ने तैयारियां एक दिन पहले से ही शुरू की थी। बाजार में इस व्रत में इस्तेमाल होने वाले सभी सामानों की खरीदारी की। खरबूजे की डिमांड सबसे ज्यादा रही, दुकानदारों ने इसका फायदा उठाकर दस गुने महंगे दामों तक खरबूजा बेचा। सुबह स्नान-ध्यान के बाद सुहागिनें सज धज कर प्रसाद समाग्री के साथ वट वृक्षों तक पहुंची। शहर में होलीनगर चौराहा स्थित बरगद, शिवपुरी स्थित बरगद, राजपूत रेजीमेंट कैंप स्थित बरगद के पेड़ों पर महिलाओं की भीड़ उमड़ी।
महिलाओं ने फूलमाला, चावल रीठा, धागा का उपयोग करके बरगद का श्रृंगार किया। धूप, दीप अर्पित करके पूजन अर्चन किया। वट वृक्ष की परिक्रमा कर पति की लंबी आयु की कामना की। मिश्रिख, बिसवां, महमूदाबाद, लहरपुर, सिधौली, महोली, मछरेटा आदि कस्बों के साथ ही ग्रामीण अंचल में पूजन की रौनक खुशनुमा मौसम, बारिश के बावजूद रही।
विज्ञापन

दुर्गा मंदिर आलमनगर के पुजारी पंडित महेश ने बताया कि हिंदू धर्म के समस्त रीति रिवाज और अध्यात्मिक अनुष्ठान कहीं न कहीं प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन से जुड़े हैं। मान्यता है कि सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे तपस्या करके पति के प्राणों की रक्षा की थी, इसी वजह से महिलाएं वट वृक्ष को पूजकर पति के दीर्घायु होने की कामना करती हैं। शास्त्रों के अनुसार वट वृक्ष में तीन देव यानी ब्रह्मा, विष्णु व महेश का वास रहता है। वैज्ञानिक भी बरगद के पेड़ को प्राण वायु का अच्छा स्रोत करार देते हैं।
बारिश भी नहीं डिगा पाई हौसला, भीगते हुए पूजा करने पहुंची व्रती
पिछले वर्ष वट सावित्री पूजा के समय कोरोना लॉकडाउन लगा था। महिलाओं ने घर में ही बरगद की टहनी मंगाकर पूजन-अर्चन कर लिया था, लेकिन इस बार महिलाओं ने पेड़ का ही पूजन किया। उत्साह इस कदर रहा कि गुुुरुवार की सुबह से हो रही मूसलाधार बारिश भी उनकी आस्था को डिगा नहीं सकी। बारिश सुबह 6 बजे से ही शुरू हो गई थी। ऐसे में इंतजार के बाद सुुहागिनें बारिश के बीच ही पूजन के लिए थाल लेकर घरों से निकलीं। कोई भीगते हुए तो कोई छाता लगाकर बरगद तक पहुंचा और इसके बाद बारिश के बीच पूजा की।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें