डॉक्टरों की लापरवाही से शनिवार को जच्चा-बच्चा की जान पर बन आई। मामला सीएचसी लहरपुर का है। यहां डॉक्टरों ने कैंप में एक गर्भवती की ही नसबंदी शुरू कर दी। चीरा लगाने के बाद महिला के गर्भवती होने का पता चलते ही डॉक्टरों के हाथ-पांव फूल गए।
अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा हुआ। डॉक्टरों ने शिकायत न करने का भरोसा लेते हुए परिवार को घर भेज दिया। बहरहाल घटना ने महकमे की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिया है। अधिकारी जांच की बात कह रहे हैं।
लहरपुर सीएचसी में शनिवार को नसबंदी कैंप लगाया गया था। यहां पर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम महलपुरवा निवासी संजय की पत्नी कौशल्या देवी भी आई थीं। कौशल्या की जांच के बाद उसे ऑपरेशन रूम में ले जाया गया। यहां पर चिकित्सकों ने नसबंदी के लिए जैसे चीरा लगाया, तो उन्हें महिला के गर्भवती होने का पता चला।
चिकित्सक ने आननफानन टांका लगाया और उसे ऑपरेशन थियेटर से बाहर निकाला। डॉक्टरों ने महिला के परिवार को बताया कि वह गर्भवती है। उसके पेट में करीब तीन माह का गर्भ है। जब यह जानकारी महिला के परिवारीजनों को हुई तो वे भड़क उठे।
परिवार के सदस्यों ने चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठाया। परिवार के सदस्यों का कहना था कि आखिर नसबंदी के पहले अस्पताल में हुई जांच में लापरवाही क्यों की गई। उधर, ऑपरेशन करने वाले डॉ. राजीव द्विवेदी ने बताया कि नसबंदी का ऑपरेशन कराने से पहले स्वास्थ्य केंद्र की पैथालॉजी जांच कराई गई थी।
जांच में उसे प्रेगनेंट न होना बताया गया था। महिला पूरी तरह से स्वस्थ है। हालांकि इस बात को लेकर चिकित्सक ने क्षेत्र की आशा बहू को खरी खोटी सुनाई। इस पर आशा बहुएं भड़क गईं और उन्होंने सीएचसी परिसर में प्रदर्शन किया। काफी देर तक हंगामा चला।