सीतापुर जिले में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान से घटिया और खराब राशन मिलने के मामले सामने आए हैं। कहीं पैकेट से सड़े चने निकल रहे तो कहीं चावल की बोरी में कंकड़ व लकड़ी मिल रही है। कई बार राशन फफूंदी लगा व घुना भी निकलता है। अक्सर कोटे की दुकानों से खराब गुणवत्ता का राशन मिलने की शिकायतें सामने आती हैं। उपभोक्ताओं की शिकायत पर अधिकारी ध्यान नहीं देते या फिर जांच की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं। कोटेदारों का कहना है कि जो चना विपणन गोदाम से मिला है, वह उसी का वितरण कर रहे हैं। इसके लिए चना वितरण करने वाली एजेंसी जिम्मेदार है।
उन्हें जैसा राशन मिलता है, वितरित करते हैं। नाम न छापने की शर्त पर कई कोटेदारों ने बताया कि खेल गोदाम या गोदाम से ब्लॉक पर राशन भेजे जाने के दौरान रास्ते में होता है। वजन, पूरा करने के लिए कंकड़ और लकड़ी बोरी में भर दी जाती है। देखरेख में लापरवाही के कारण फफूंदी लगने की समस्या उत्पन्न होती है। कोटेदारों के मुताबिक खराब राशन ऊपर से मिलता है, मगर कार्डधारकों के गुस्से का शिकार उन्हें होना पड़ता है। कई बार तो कार्डधारक उलझ जाते हैं और विवाद की नौबत आ जाती है। कार्डधारकों का कहना है कि खराब राशन मिलने की शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती है।
कई पैकेटों पर पैकिंग की तारीख ही नहीं
कार्डधारकों को वितरित होने वाले चने के तमाम पैकेटों पर पैकिंग व उत्पादन की तारीख भी नहीं लिखी है। एक्सपायरी तिथि के स्थान पर पैकिंग से छह माह के भीतर इस्तेमाल की वैधता लिखी हुई है। जब पैकिंग का विवरण ही दर्ज नहीं है तो एक्सपायरी का आंकलन कैसे होगा।
पैकेट से निकले घुने चने
मिश्रिख नगर स्थित कोटे की दुकान से खराब राशन मिल रहा है। सीता कुंड वार्ड नंबर दो निवासी अमन ने बताया कि कृष्णा देवी की कोटे की दुकान से राशन लेकर घर पहुंचे। चने का पैकेट खोला तो चने घुने थे। जब कोटेदार से शिकायत की तो जवाब मिला कि हम पैकेट के अंदर तो नहीं देखते हैं। जैसे पैकेट हमको गोदाम से मिले हैं, वहीं वितरित करते हैं।
चावल की बोरी में निकले कंकड़ व लकड़ी
खैराबाद नगर के एक कोटेदार ने बताया कि चावल की बोरी में कंकड़ और एक बोरी में लकड़ी निकली। ऊपर थोड़ा चावल और नीचे बजरी व लकड़ी भरी थी। कोटेदार के मुताबिक यह खेल गोदाम में होता है या फिर गोदाम से ट्रक पर लाने वाले वजन को पूरा करने के लिए लकड़ी व बजरी बोरी में भर देते हैं। एक अन्य कोटेदार ने बताया कि कभी घुना तो कभी फफूंदी लगा राशन भी आ जाता है। उसे फेंकना पड़ता है। कोटेदारों के मुताबिक घटतौली भी होती है। जब यहां अनाज वजन कराया जाता है तो पूरा नहीं निकलता है।
जिला पूर्ति अधिकारी संजय प्रसाद का कहना है कि चना व अन्य राशन खराब निकलने की जानकारी नहीं है। ऐसी कोई शिकायत भी नहीं मिली है। जांच कराई जाएगी। इसकी गुणवत्ता परखी जाएगी। कार्डधारक खराब चना, राशन न लें। जिले में वितरित होने वाला राशन गुणवत्तापरक होता है।