अंबेडकरनगर जिले में पुल निर्माण को लेकर प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की अनदेखी कभी भी ग्रामीणों की जान पर भारी पड़ सकती है। सिर्फ पिकिया व तमसा नदी पर ही करीब डेढ़ दर्जन स्थानों पर पुल निर्माण की मांग की लगातार अनदेखी हो रही है। दशकों पुरानी मांग के बावजूद इस समस्या के निस्तारण को लेकर जिम्मेदारों की उदासीनता का खामियाजा इलाके की एक लाख से अधिक की आबादी को आवागमन में होने वाली परेशानी के बतौर भुगतना पड़ रहा है।
मजबूरी में ग्रामीणों को खुद से तैयार किए गए लकड़ी व बांस के साथ पाइप के पुल से जोखिम उठाकर आवागमन को मजबूर होना पड़ रहा है। पानी के तेज बहाव में यह पुल अक्सर क्षतिग्रस्त तक हो जाते हैं। खतरे से बचने की कोशिश में ग्रामीणों को लंबी दूरी तय कर गंतव्य तक पहुंचने की परेशानी उठानी पड़ती है। पुल निर्माण न होने से सबसे ज्यादा परेशानी क्षेत्र के स्कूली बच्चों, बुजुर्गों व बीमार लोगों को उठानी पड़ती है। भीटी, अकबरपुर व जलालपुर तहसील क्षेत्र में करीब आधा दर्जन स्थानों पर तमसा नदी पर पुल निर्माण की जरूरत को प्रशासन अनदेखा कर रहा है।
शासन को भेजे जाएंगे पुल बनाने के प्रस्ताव
किए जा रहे प्रयास
डीएम सैमुअल पॉल एन का कहना है कि विभिन्न क्षेत्रों में आवागमन में हो रही परेशानी से छुटकारा दिलाने के लिए पुल निर्माण की जरूरत है। इनमें से कई जगहों पर पुल बनाए जाने संबंधी प्रस्ताव शासन को भी भेजे जा चुके हैं। पुल निर्माण से जुड़ा कार्य प्राथमिकता पर हो, इसके लिए सेतु निगम के साथ मिलकर सभी जरूरी प्रयास कराए जा रहे हैं।
जुगाड़ से बनाया पाइप पुल
कटेहरी विधानसभा क्षेत्र में महरुआ से मिझौड़ा तथा आनंदनगर से मिझौड़ा जाने वाले मार्ग पर बड़ेरिया के निकट तमसा नदी पर पुल निर्माण की मांग कई दशक से की जा रही है। सुनवाई न होने पर दो दशक पहले बड़ेरिया व नरहरपुर के ग्राम प्रधानों ने आपसी संसाधन जुटाकर वैकल्पिक व्यवस्था के तहत पाइप के पुल का निर्माण कराया था। तमसा में उफान होने पर यह पुल भी बेकार हो जाता है। मिझौड़ा चीनी मिल के अलावा, कटेहरी ब्लाक तथा स्कूल कालेज जाने वालों को इस खतरनाक हो चुके वैकल्पिक पुल का ही इस्तेमाल करना पड़ता है।
बांस के पुल से हो रहा आवागमन
अकबरपुर तहसील के रामनगर नरसिंहपुर व कटुई गांव के बीच तमसा नदी पर पक्के पुल के निर्माण की मांग को जनप्रतिनिधि से लेकर अधिकारी तक दशकों से उदासीन बने हैं। उपेक्षा के चलते ही ग्रामीणों को वैकल्पिक इंतजाम के तहत बनाए गए बांस के पुल से खतरा उठाकर आवागमन को मजबूर होना पड़ता है। इससे जर्जर हो चुके इस पर पुल जानलेवा हादसे की आशंका लगातार बनी रहती है।
ढह गया लकड़ी का पुल
जलालपुर तहसील के चौदहप्रास गांव में ग्रामीणों द्वारा तमसा नदी पर बनाया गया लकड़ी का पुल जर्जर होकर ढह चुका है। तेज बारिश में ढह गए इस पुल के कारण अब ग्रामीणों को सुरजूपुर व अन्य क्षेत्र से लंबा चक्कर लगाकर आवागमन करने को विवश होना पड़ रहा है। पुल निर्माण के लिए नेताओं से लेकर अधिकारियों तक से लगातार की जा रही मांग की भी पूरी तरह अनदेखी की जा रही है।
टूटे पुल की खुद करनी पड़ी मरम्मत
जलालपुर तहसील क्षेत्र के करमुलहा गांव में ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से लकड़ी का बड़ा पुल बना रखा है। वैकल्पिक तौर पर तैयार यह पुल भी बीते दिनों जर्जर होकर टूट गया। इससे अब आवागमन में परेशानी उठानी पड़ रही है। यहां पुल निर्माण की मांग को लेकर बीते दिनों ही छात्र-छात्राओं व ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन भी किया था। इसके बावजूद ग्रामीणों की इस अहम परेशानी को लेकर अधिकारी पूरी तरह उदासीन बने हैं।
लकड़ी व बांस से बनाया पुल
जलालपुर तहसील क्षेत्र के गौरामहमदपुर गांव में भी तमसा नदी पर पुल निर्माण की मांग की जिम्मेदार लगातार अनदेखी कर रहे हैं। ग्रामीणों ने यहां जुगाड़ के जरिए आवागमन के लिए वैकल्पिक तौर पर खंभों, लकड़ी व बांस का प्रयोग कर काम चलाऊ पुल बना रखा है। गांव निवासी रामजीत व चक्रसेन का कहना है कि सालों से की जा रही पुल निर्माण की मांग नहीं सुनी जा रही है।