सकरन/सीतापुर। सकरन में केवल कागजों पर धान की खरीद हो रही हैं। क्रय केंद्रों पर बिचौलियों का धान खरीदा जा रहा है। किसान कम कीमत पर इन्हें अपना धान बेचने को मजबूर हो रहे हैं। इससे किसानों को धान पैदा करने में लगी लागत भी नहीं मिल रही है। इससे वह परेशान है। उनकी चिंता रबी की फसल बोआई को लेकर भी है।
विकास खंड सकरन में साधन सहकारी समिति दुगाना पर पीसीयू संस्था का धान क्रय केंद्र संचालित है। यह क्रय केंद्र सिर्फ कागजों पर चलाया जा रहा है। केंद्र पर धान ले जाने वाले किसानों को धान में नमी, फरहा, मिट्टी आदि होना बताकर केंद्र से वापस कर दिया जाता है। केंद्र प्रभारी द्वारा अपने चहेतों के नाम फर्जी धान खरीद दिखाकर बिचौलियों व दलालों के धान की खरीद की जाती है। क्षेत्रीय किसान बाजारों व गल्ला मंडियों में 1000 से 1100 रुपये में धान बेचने पर मजबूर हैं। वहीं बाजार से बिचौलियों द्वारा कम मूल्य पर खरीदा गया किसानों का धान क्रय केंद्र पर बेचा जा रहा है।
बिचौलियों द्वारा लाए गए इस धान में केंद्र प्रभारी द्वारा न तो नमी देखी जाती है और न ही मिट्टी। जबकि किसानों को तमाम तरह की बातें बताकर केंद्र प्रभारी द्वारा उनकी खून पसीने से पैदा की गई फसल को रिजेक्ट कर दिया जाता है। क्षेत्रीय किसान घनश्याम, आशा राम, सुशील कुमार, प्यारे लाल, मनोहर लाल, दयाशंकर आदि ने केंद्र की जांच करवाकर किसानों का धान क्रय केंद्रों पर तुलवाए जाने की मांग की है।
क्षेत्र के ताजपुर गांव निवासी खूबकरन का कहना है कि वह 40 कुंतल धान लेकर दुगाना क्रय केंद्र गए, मगर वहां यह कहकर वापस कर दिया गया कि तुम्हारा धान नहीं खरीदा जाएगा। क्रय केंद्र से वापस आकर उन्होंने अपना धान 1010 रुपये प्रति कुंतल बाजार में बेंच दिया। ताजपुर निवासी लालता सिंह ने बताया कि वह धान दुगाना क्रय केंद्र पर लेकर गये थे। जहां से यह कहकर वापस कर दिया गया कि क्रय केंद्र पर खाली बोरी नहीं हैं। मजबूरी में 980 रुपये प्रति कुंतल बाजार में धान बेचना पड़ा। सलौली गांव निवासी कमलेश यादव ने बताया कि वह 70 कुंतल धान दुगाना क्रय केंद्र पर लेकर गये थे। मगर उनका धान केंद्र पर नहीं तौला गया। इसके बाद वहां मौजूद दलालों ने 1100 रुपये प्रति कुंतल वही धान नकद भुगतान करके खरीद लिया।
क्रय केंद्र प्रभारी देशराज द्विवेदी ने बताया कि धान खरीदने के लिए मानक तय हैं। किसान द्वारा लाए गए धान की नमी की जांच की जाती है। नमी का प्रतिशत सही होने पर एवं धान साफ होने पर खरीदा जाता है।