सीतापुर हत्याकांड के रहस्य का पर्दाफाश हो गया है। बृहस्पतिवार को आईजी रेंज तरुण गाबा ने एसपी चक्रेश मिश्र के साथ प्रेस वार्ता कर इस हत्याकांड के खुलासे का दावा किया। अमर उजाला ने बीते 13 मई के अंक में अजीत के कुबूलनामे की बात प्रकाशित की थी। आईजी रेंज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अमर उजाला के इस खुलासे पर मुहर लगा दी। आईजी रेंज तरुण गाबा ने बताया कि अजीत ने मात्र 90 मिनट में ही छह लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद लोगों को गुमराह करने के लिए एक कहानी बनाई। यही कहानी सबको बताई। जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई तो अजीत से सख्ती से पूछताछ शुरू हुई। तब जाकर उसने हत्या की बात कबूल कर ली। आरोपी अजीत सिंह के विरुद्ध रामपुर मथुरा थाने में हत्या व आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा गया है।
इस पूरी प्रकिया के बाद भी कुछ ऐसे सवाल रह गए हैं जिनका उत्तर पुलिस के पास नहीं है। ना ही अजीत से इस बारे में कोई बात की गई है।
पल्हापुर हत्याकांड: अनसुलझे रह गये कई सवाल
- अजीत हृदयरोग से पीड़ित है। उसकी बाईपास सर्जरी हुई थी। ऐसे में अकेले एक हृदयरोगी इतनी जघन्य वारदात कैसे अंजाम दे सकता है।
- अजीत खुद को लंबे समय से अपमानित महसूस कर रहा था तो क्या अपनी पत्नी विभा को इस हत्याकांड की भनक नहीं लगने दी।
- अजीत के पिता वीरेंद्र सिंह के साथ ताऊ आरपी सिंह ने प्राॅपर्टी में धोखा किया था। अजीत की उनसे कोई अदावत कैसे नहीं थी। जबकि यह हत्याकांड प्राॅपर्टी और लोन की रकम के कारण हुआ।
- जिस ढंग से अनुराग को गोली मारी गई, यह किसी प्रोफेशनल किलर का तरीका लगता है। एक शिक्षक इस तरीके से गोली कैसे चला सकता है।
- पुलिस की थ्योरी के मुताबिक आला कत्ल अवैध तमंचा पिता वीरेंद्र सिंह का था। ऐसे में अजीत कारतूस कहां से लाया, इस दिशा में कोई जांच नहीं हुई।
- कुल केसीसी लोन की रकम 24 लाख बताई जा रही है। ऐसे में पिता की मौत के बाद अजीत पर मात्र एक तिहाई ऋण अदा करने का दबाव होता। अगर अनुराग या मां सावित्री यह रकम नहीं जमा करते तो इसमें अजीत का क्या नुकसान होता। बैंक तो सावित्री और अनुराग से शेष रकम की वसूली करता।
- अजीत की पत्नी विभा घटना से ठीक पहले अपने बच्चों को मायके छोड़ आई थी। क्या उसे भनक लग गई थी कि कुछ बड़ा कांड होने वाला है।
सही दिशा में जांच चलती रहे...वरना ऊपर का दरवाजा खटखटाऊंगा
मृतक प्रियंका सिंह के भाई अंकित सिंह ने खुलासे पर अमर उजाला से विशेष बातचीत की। अंकित सिंह ने बताया कि पुलिस ने अजीत को केवल हत्यारोपी बताया है। उसके साक्ष्य भी दिये हैं। इस बारे में मुझे लगातार विश्वास में लेकर जांच की जा रही है। हालांकि इसमें ताऊ आरपी सिंह की भूमिका की गहन जांच होनी चाहिए। अंकित का आरोप है कि जब ताऊ आरपी सिंह ने सामने तड़पते बच्चों को देखा तो अजीत से अस्पताल ले जाने के लिए क्यों नहीं कहा। वहीं, आरपी सिंह ने जिस इस हत्याकांड के दौरान बर्ताव रखा, वह संदेह के घेरे में है। पुलिस को यह देखना चाहिए कि प्रापर्टी से सबकी मौत के बाद लाभान्वित कौन हो रहा है। इस एंगल की गहनता से जांच होनी चाहिए। इतने बड़े घर में बच्चों को बचाने कोई नहीं आया, यह संदेह करने वाली बात है। मेरी प्राथमिकता है कि जघन्य हत्याकांड में शामिल कोई भी व्यक्ति छूटने न पाये। जो व्यक्ति अजीत की पैरवी करेगा, उसकी भूमिका की पड़ताल भी होनी चाहिए। पुलिस ने इसका आश्वासन भी दिया है। सही दिशा में जांच चलती रहे। हमारे दिये सारे बिंदुओं पर जांच होती रहे। वरना ऊपर का दरवाजा खटखटाऊंंगा।