सकरन (सीतापुर)। ताजपुर सलौली के बाशिंदों ने एक बार फिर से साबित कर दिया कि चट्टानी इरादों के बूते मुश्किल काम भी मुमकिन है। किवानी नदी पर श्रमदान व चंदा जुटाकर महज तीन दिनों में बांस-बल्ली का अस्थाई पुल खड़ा कर 14 गांवों के ग्रामीणों का बाधित आवागमन बहाल कर दिया है। इस पुल को बनाने में 80 हजार रुपये का खर्च हुए हैं।
पुल बनने से अब सैकड़ों ग्रामीणों को बैंक, अस्पताल, थाना व बाजार जाने के लिए लगभग 20 किलोमीटर का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। दरअसल, ब्लॉक सकरन की ग्राम पंचायत ताजपुर सलौली के करीब से बहने वाली किवानी नदी पर पुल नहीं होने से मुर्थना, झौव्वा, मंगतनपुरवा, देवमन, बेलवा, ताजपुर, सलौली, बसहिया, साइनपुरवा, अहिरनपुरवा, कलिका पुरवा समेत 14 गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों को लगभग 20 किमी की दूरी तय करते हुए मडोर पुल से होकर गुजरना पड़ता था। इलाकाई बाशिंदे कई वर्षों तक शासन-प्रशासन से यहां पुल निर्माण की मांग करते रहे।
चुनाव के समय नेता यहां पुल बनवाने का वादा करते बाद में भूल जाते। शासन-प्रशासन की तरफ से पुल बनवाने का कोई प्रयास नहीं किया गया। थक हारकर ग्रामीणों ने पांच वर्ष पूर्व चंदे से जुटाई गई रकम और श्रमदान से किवानी नदी पर बांस-बल्ली का 100 मीटर लंबा अस्थाई पुल बना लिया। इससे सैकड़ों लोगों को नदी पार करने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती थी। समय-समय पर ग्रामीण खुद इस पुल की मरम्मत करते रहते थे। इसके बाद भी पुल धीरे-धीरे जर्जर होता जा रहा था।
समस्या को देखते हुए सलौली गांव के रहने वाले जयराम सिंह, कमलेश यादव, तीरथराम, अशोक, मिल्ली, काशीराम मौर्य इत्यादि ने फिर चंदा व श्रमदान से बांस-बल्ली का पुल बनाने का बीड़ा उठाया। चंदे की रकम से पुल में इस्तेमाल होने वाली सामग्री लाकर निर्माण शुरू कर दिया। श्रमदान से महज तीन दिनों से ग्रामीणों ने किवानी नदी पर बांस-बल्ली का 100 मीटर लंबा पुल बनाकर तैयार कर दिया। पुल बनाने वाले ग्रामीणों के मुताबिक इसमें 80 हजार रुपये खर्च हुए हैं। पुल बनने से 14 गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों की राह फिर आसान हो गई है।