सीतापुर। कटिया स्थित कृषि विज्ञान केंद्र को राष्ट्रीय मखाना बोर्ड ने जिले में मखाना की खेती को बढ़ावा देने के लिए नोडल केंद्र बनाया गया है। इसके तहत केंद्र के वैज्ञानिक लगातार किसानों को मखाना खेती के लिए जागरूक कर रहे हैं, ताकि किसान इसकी वैज्ञानिक विधि से खेती कर बेहतर उत्पादन ले सकें और अपनी आमदनी बढ़ा सकें।
कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. दयाशंकर श्रीवास्तव ने बताया कि मखाना की खेती तालाबों और जलभराव वाले क्षेत्रों में आसानी से की जा सकती है। जिले के किसान खेत तालाब योजना का लाभ उठाकर मखाना खेती शुरू कर सकते हैं। एक तरफ मखाना का उत्पादन होगा, वहीं दूसरी तरफ उसी तालाब में मछली पालन भी किया जा सकेगा जिससे किसानों की आय में इजाफा होगा।
वैज्ञानिकों ने किसानों को मखाना की उन्नत किस्मों, नर्सरी तैयार करने, पौध रोपण, खाद-उर्वरक प्रबंधन और फसल सुरक्षा की पूरी जानकारी दी। बताया कि मखाना की खेती में कम लागत आती है और बाजार भाव अच्छा मिलने से मुनाफा अधिक होता है। साथ ही मखाना पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जिसकी मांग देश-विदेश में लगातार बढ़ रही है।
केंद्र की ओर से किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण, प्रदर्शन प्लॉट और समय-समय पर सलाह भी दी जा रही है। राष्ट्रीय मखाना बोर्ड का उद्देश्य बिहार के बाहर अन्य राज्यों में भी मखाना खेती का रकबा बढ़ाना है, जिसमें सीतापुर जिले को प्रमुखता दी गई है। कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि इच्छुक किसान केंद्र पर संपर्क कर मखाना खेती की पूरी जानकारी लें और योजना का लाभ उठाएं। इससे परंपरागत खेती से हटकर किसान नकदी फसल की ओर बढ़ेंगे और आत्मनिर्भर बन सकेंगे।