सीतापुर। नैमिषारण्य तीर्थ में सावन मास की अमावस्या का पर्व रविवार को श्रद्धा से मनाया गया। इस दौरान भक्तों ने आदि मां गोमती व चक्रतीर्थ में स्नान किया। मां ललिता देवी सहित विभिन्न मठ मंदिरों के दर्शन कर पुण्य कमाया। इस दिन नगर के शिव मंदिरों में भारी भीड़ रही। इस अमावस्या को हरियाली अमावस्या या श्रावणी अमावस्या भी कहा जाता है।
मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव मां पार्वती की पूजा से दाम्पत्य जीवन खुशहाल रहता है। श्री हरि विष्णु की पूजा से इच्छित फल की प्राप्ति होती है। पितरों की आत्मा शांति के तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध, श्री विष्णु सहस्त्रनाम पाठ, गीता पाठ, गरुड़ पुराण, गजेंद्र मोक्ष पाठ आदि धार्मिक कर्मकांड किए जाने से पितृ तृप्त होते है।
अमावस्या तिथि पर नाभि गया नैमिषारण्य तीर्थ के गोमती व चक्रतीर्थ स्नान का विशेष महत्व होता है। तीर्थ में स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य देकर पितरों का तर्पण किया जाता है।
राशि के अनुसार पौधे रोपने से शांत होते हैं ग्रह
हरियाली अमावस्या के दिन अपनी राशि के अनुसार पौधे रोपने से ग्रह शांत होते हैं। इस दिन लगाए पौधे जैसे-जैसे बढ़ते हैं, उसी तरह से पौधा लगाने वाले जातक के भी आरोग्य, सुख, समृद्धि में वृद्धि होती जाती है। रविवार सावन अमावस्या पर्व पर श्रद्धालुओं ने चक्रतीर्थ व गोमती नदी में स्नान आचमन कर दान पूजन किया।
इसके बाद नगर के प्रमुख मंदिर ललिता देवी मंदिर, व्यास गद्दी, हनुमानगढ़ी, सूत गद्दी, शौनक गद्दी, बाला जी मंदिर, कालीपीठ, सत्यनारायण सन्निधि आश्रम, देवदेवेश्वर आदि मंदिरों में दर्शन पूजन किया। इस मौके पर श्रद्धालुओं ने अपनी राशि के अनुसार पौधारोपण भी किया।