सीतापुर। बाढ़ आने से पहले कटान की रोकथाम के लिए सिंचाई विभाग तैयारियाें को चाक-चौबंद करने में जुटा है। सिंचाई विभाग सैंड बैग और गैबियन जाल तैयार कर रहा है। शारदा व सरयू नदियों के उफनाने पर यदि कटान की स्थिति आती है तो सैंड बैग और गैबियन जाल कारगर साबित होगा। बाढ़ राहत व बचाव को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। बाढ़ राहत परियोजनाएं 15 जून तक पूरी करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
जिले की लहरपुर, बिसवां और महमूदाबाद तहसीलों का तराई क्षेत्र हर साल बाढ़ से प्रभावित होता है। बैराजों से पानी छोड़ने पर शारदा और सरयू नदियां उफनाती हैं तो सैकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। इन गांवों की लाखों की आबादी का दैनिक जीवन करीब डेढ़ माह तक मुश्किलों भरा रहता है।
बाढ़ राहत परियोजनाओं के माध्यम से शासन-प्रशासन तटीय क्षेत्रों के लोगों की मुश्किलें कम करने का प्रयास लगातार करता है। इस साल भी कई बाढ़ राहत परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इसके अलावा सिंचाई विभाग भी तैयारियों में जुटा है। कटान से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए इस बार अस्थाई विकल्प के तौर पर सैंड बैग और गैबियन जाल का उपयोग सिंचाई विभाग करेगा।
सैंड बैग और गैबियन जाल बनाए जा रहे हैं। इनका प्रयोग आवश्यकता के मुताबिक सिंचाई विभाग करेगा। इससे कटान का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विशाल पोरवाल ने बताया कि बाढ़ से राहत व बचाव को लेकर तैयारियां चाक-चौबंद हैं। सैंड बैग और गैबियन जाल भी बनाए गए हैं।
कटान रोकने को ऐसे करते हैं उपयोग
बाढ़ आने पर जब बेकाबू लहरें नदी के किनारे कटान करने लगती हैं तब यह विकल्प अपनाया जाता है। सैंड बैग में बालू अथवा मिट्टी भरी जाती है। गैबियन जाल और सैंड बैग नदी के किनारे लगाया जाता है। इससे किनारे पर एक दीवार बन जाती है, लहरों की थपेड़े नदी के किनारे के बजाय इस दीवार से टकराती हैं। इससे कटान का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।