रानी कोठी में कार्रवाई के दौरान मौजूद सिटी मजिस्ट्रेट, ईओ व पुलिस बल। संवाद
सीतापुर। शहर की रानी कोठी को प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया है। मंगलवार को सिटी मजिस्ट्रेट व नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी ने यहां कब्जेदारों के ताले तोड़कर भवन अधिकृत कर लिया। प्रशासन की ओर से इमारत में 17 ताले डाले गए हैं।
जिलाधिकारी कोर्ट की ओर से विगत दो मई को रानी कोठी के कब्जेदारों की आपत्तियों को खारिज करते हुए 15 दिन में इमारत खाली कराने का आदेश पालिका प्रशासन को दिया गया था। समय बीतने पर आदेश के अनुपालन में यह कार्रवाई की गई है। शहर की बेशकीमती ऐतिहासिक संपत्तियों में शुमार रानी कोठी का ताल्लुक नबीनगर (राजस्थान) के राजघराने से है।
मोहल्ला बट्सगंज स्थित रानी कोठी नजूल भूखंड संख्या 1568 पर स्थित है। जिलाधिकारी न्यायालय ने विगत दो मई को रानी कोठी के संबंध में ऐतिहासिक निर्णय सुनाया था। रानी कोठी पर काबिज सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल विक्रम शर्मा एवं मधुलिका त्रिपाठी तथा राजेंद्र कुमारी की आपत्तियों को जिलाधिकारी न्यायालय ने खारिज कर दिया था। जिलाधिकारी ने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को 15 दिन के भीतर रानी कोठी का भौतिक रूप से कब्जा लेकर जिला प्रशासन को सौंपने के निर्देश दिए थे।
इसी क्रम में तय समय के बाद सिटी मजिस्ट्रेट मीनाक्षी पांडेय व अधिशासी अधिकारी वैभव त्रिपाठी प्रशासनिक व पुलिस अमले के साथ मंगलवार को रानी कोठी पहुंचे। यहां कब्जेदारों के ताले तुड़वाकर भवन को अधिकृत कर लिया। प्रशासन की ओर से भवन में अपने 17 ताले डाले गए हैं। इस संपत्ति की वर्तमान में अनुमानित कीमत 100 करोड़ रुपये बताई जा रही है। ईओ वैभव त्रिपाठी के मुताबिक नजूल की जमीनों से अवैध कब्जा हटाने का अभियान आगे भी जारी रहेगा।
कोठी में वृद्धाश्रम बनाने की चल रही कवायद
शहर की ऐतिहासिक रानी कोठी में वृद्धाश्रम व अन्य जनोपयोगी परियोजनाओं को विकसित किए जाने की कवायद चल रही है। भविष्य में यह भवन जिले के असहाय और निर्धन बुजुर्गों का ठिकाना बनाया जाएगा। इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।