जिला व क्षेत्र पंचायत के उम्मीदवार किसी दल, नेता अथवा अपने प्रतिद्वंद्वी पर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं कर सकते हैं। बगैर अनुमति के सार्वजनिक स्थान पर सभा-जुलूस के अलावा प्रचार सामग्री लगाने की बंदिश भी रहेगी।
इन बातों की अनदेखी आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा। आचार संहिता तोड़ने वाले कार्रवाई की जद में आएंगे। पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही आचार संहिता प्रभावी हो गई है।
जिला व क्षेत्र पंचायत का चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता के आधार पर आदर्श आचार संहिता का ख्याल रखना है। आचार संहिता का उल्लंघन करने की दशा में कार्रवाई की चाबुक झेलनी पड़ेगी। उप जिला निर्वाचन अधिकारी सर्वेश कुमार ने बताया कि राज्य चुनाव आयोग पारदर्शी व शांति पूर्ण चुनाव कराने को प्रतिबद्ध है।
इसके अलावा आदर्श आचार संहिता का पालन भी आयोग की प्राथमिकता में है। उन्होंने बताया कि आचार संहिता के तहत प्रत्याशी ऐसा कोई काम नहीं करेगा जिससे धार्मिक व जातीय उन्माद फैलने की संभावना हो। सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने को मंदिर, मस्जिद, गिरिजाघर या किसी देव स्थान तथा मतदान केंद्र के 100 मीटर की परिधि में सभा-प्रचार नहीं कर सकता है।
सार्वजनिक स्थान पर प्रचार सामग्री लगाने पर पूर्णतय: प्रतिबंध है। घरों व प्रतिष्ठानों पर प्रचार सामग्री लगाने को संबंधित प्रापर्टी मालिक की अनुमति लेनी होगी। सभा-जुलूस के लिए प्रशासन से अनुमति लेनी होगी।
इस दौरान किसी दल या नेता का पुतला दहन के साथ किसी भी तरह के प्रदर्शन नहीं किए जा सकेंगे। मतदान के 48 घंटे पहले प्रचार थम जाएगा। वोटर को किसी तरह का प्रलोभन भी आचार संहिता का उल्लंघन है।