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पानी से घिरी एक सैकड़ा आबादी, तीन घरों पर लटकी कटान की तलवार

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रेउसा/रामपुर मथुरा (सीतापुर)। पहाड़ों पर हो रही बारिश और बैराजों से छोड़े जाने वाले लाखों क्यूसेक पानी का असर जिले के गांजर इलाके में देखने को मिल रहा है। यहां उफनाई सरयू व शारदा नदी मुसीबत का सबब बनी हुई हैं। सरयू का जलस्तर बढ़ने से रेउसा क्षेत्र में नगीनापुरवा के तीन मकानों पर कटान की तलवार लटकने लगी है, जबकि रामपुर मथुरा क्षेत्र के परमगोंडा गांव की आबादी चारों तरफ से पानी से घिर गई है। ग्रामीण नाव से सुरक्षित स्थान को पलायन करने लगे हैं।
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सरयू नदी का बढ़ रहा जलस्तर रेउसा इलाके में लगातार खतरे की घंटी बजा रहा है। बीते चार दिनों से तटीय क्षेत्र के कई संपर्क मार्ग पानी के बहाव की चपेट में हैं। बिल्लर पुरवा, जटपुरवा, फौजदार पुरवा आदि करीब 10 ऐसे गांव हैं, जहां बाढ़ का पानी चंद कदमों की दूरी पर ही हिलोरें मार रहा है। बाढ़ का पानी धीरे.धीरे गांवों की तरफ बढ़ रहा है, जिससे तटीय इलाकों के लोगों में हड़कंप मचा है। शुक्रवार को बेकाबू लहरें नगीना पुरवा के करीब पंहुच गई हैं। इस गांव के निवासी इंदलए गया प्रसाद व सुर्जलाल के मकानों से पानी चंद कदमों की दूरी पर आ पहुंचा है। जिससे इन मकानों पर कटान का खतरा मंडराने लगा है। चकमार्ग पानी में गुम होने से किसानों को खेत की फसल का हाल जानने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है।
नदी का पानी जिस हिसाब से बढ़ रहा है। उसे देखकर तटीय क्षेत्र के बाशिंदे भयभीत हैं। लोगों का कहना है कि नदी का पानी जाने कब आबादी में घुस जाए और गांव बाढ़ की चपेट में आ जाए। इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। उधर रामपुर मथुरा इलाके में सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर से तटवर्ती गांवों के लोगो में बाढ़ की त्रासदी का भय व्याप्त होने लगा है। अधिकांश ग्रमीणों के खेतों में पानी भरने लगा है। पानी भरने से फसलों को भारी नुकसान की चिंता सताने लगी है। कनरखी, अंगरौरा, शुकुलपुरवा, बगस्ती, कलुआपुर के आसपास नदी का पानी खेतों में भरने लगा है। ग्रामीणों ने बताया कि यदि कुछ दिनों तक खेतों में पानी भरा रहा तो किसानों की मेंथा व मक्के की फसलें व धान की नर्सरी पूरी तरह से खराब हो जाएंगी। वहीं, कलुआपुर ग्राम सभा के परमगोण्डा गांव की लगभग एक सैकड़ा की आबादी चारों तरफ से पानी से घिर गई है। प्रशासन द्वारा इस मजरे के लिए नाव की व्यवस्था कराई गई है और लोगों को सुरक्षित स्थान पर आने को कहा गया है ।
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बाढ़ के खतरे के साथ उपजी कई मुसीबतें
सरयू के किनारे बसे गांवों के ग्रामीणों पर बाढ़ का खतरा ही नहीं मंडरा रहा बल्कि कई मुसीबतें भी उत्पन्न होने लगी हैं। खेतों में पानी भरने से पशुओं के लिए चारे का संकट पैदा हो गया है। साथ ही बच्चों, बूढ़ों और पशुओं में संक्रामक रोग पनपने का खतरा भी बढ़ गया है।
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