सीतापुर। वित्तीय साल के अंतिम दिन बुधवार को विभिन्न विभागों की ओर से बजट खर्च करने के लिए भेजे गए बिलों का निस्तारण करने के लिए देर रात तक कोषागार दफ्तर खुला रहा। वरिष्ठ कोषाधिकारी सहित अन्य स्टाफ इस काम में जुटे रहे। कुछ विभागों को देर से बजट मिलने के कारण वह इसे खर्च करने में असमर्थ दिखे। मंगलवार को जिन विभागों के अधीन बड़ी धनराशि खर्च करने के लिए बची थी, उसे वह खपाने के लिए दिनभर व्यस्त रहे।
वित्तीय साल के अंतिम दिन बुधवार को विभिन्न सरकारी दफ्तरों में प्राप्त बजट को खर्च करने के लिए दिनभर दस्तावेज तैयार किए जाते रहे। यह कार्य देर शाम तक चला। संबंधित बिलों के निस्तारण के लिए वरिष्ठ कोषाधिकारी जान्हवी मोहन एवं उनके स्टाफ द्वारा देर रात तक दफ्तर खोलकर इसे अंतिम रूप देने का कार्य किया गया।
समाज कल्याण अधिकारी राजेश कुमार पारिवारिक लाभ योजना के मद में प्राप्त सवा दो करोड़ रुपये खपाने के लिए देर शाम तक दफ्तर खोले रहे। कृषि विभाग को शासन से बुधवार को देर से बजट प्राप्त हुआ। इसे खर्च करने के लिए उप कृषि निदेशक अरविंद मोहन मिश्र अपने कर्मचारियों के साथ व्यस्त रहे।
बेसिक शिक्षा विभाग को बजट खपाने के लिए काफी मत्था पच्ची करनी पड़ी। मंगलवार को विभाग के अधीन 48 करोड़ 81 लाख 32 हजार 404 रुपये शेष बचा था। इसी प्रकार पुलिस विभाग को 19 करोड़ 71 लाख 58 हजार 342 रूपए, एलोपैथिक चिकित्सा का 13 करोड़ 69 लाख 62 हजार 274 रुपये, लोक निर्माण (अधिष्ठान) विभाग में 10 करोड़ 82 लाख तीन हजार 609 रुपये, माध्यमिक शिक्षा विभाग में 10 करोड़ 68 लाख नौ हजार 216 रूपए शेष रह गया था।
राजस्व दैवी विपत्तियों, सिंचाई अधिष्ठान, चिकित्सा परिवार कल्याण आदि विभागों में भी करोड़ों रुपये मंगलवार को क्लोजिंग के बाद शेष रह गए थे। इसे खर्च करने के लिए इन विभागों द्वारा बुधवार को देर शाम तक कार्रवाई की गई।
कई विभागों ने सौ फीसदी खर्च किया बजट
वित्तीय साल में प्राप्त बजट को जहां कई विभागों को खर्च करने के लिए अंतिम दिन तक मत्थापच्ची करनी पड़ी, वहीं छह विभागों ने सौ फीसदी बजट खर्च कर लिया। खादी ग्रामोद्योग विभाग, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण, राष्ट्रीय एकीकरण, होमगार्ड एवं समाज कल्याण जनजाति कल्याण मद की संपूर्ण धनराशि खर्च कर ली गई है।