सीतापुर। संक्रमण की दूसरी लहर के बीच जिले में कोरोना के बढ़ते कहर का असर अब साफ दिखने लगा है। संक्रमण की दहशत के कारण लोग बसों में यात्रा कतराने से कतराने लगे हैं। बहुत जरूरी होने पर ही मुसाफिर बसों में सफर कर रहे हैं। ये हम नहीं रोडवेज पर पसरा सन्नाटा और यात्रियों के इंतजार में खड़ी खाली बसें कर रही हैं।
होली पर्व पर मुसाफिरों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाला बस स्टॉप पर सन्नाटा पसरा हुआ है। बसों के पहिए थम से गए हैं। पिछले चार दिनों से यात्रियों की संख्या लगातार घटती जा रही है, इससे निगम के जिम्मेदार भी चिंता में हैं। त्योहारों में बस स्टॉप पर भीड़-भाड़ अधिक रहती है। भारी संख्या में यात्रियों के पहुंचने से बसें फुल हो जातीं थी।
हालात यहां तक हो जाते थे कि बसों में पैर रखने की जगह ही नहीं रहती थी। ऐसे में गंतव्य तक पहुंचने के लिए यात्रियों को घंटों बसों का इंतजार करना पड़ता था, लेकिन इस बार होली में रोडवेज बस स्टॉप पर यात्रियों की भीड़ गायब रही। होली के दो दिन बाद यानी बुधवार को बस स्टॉप पर 12:35 बजे पहुंची अमर उजाला टीम को परिसर में सन्नाटा और बसें खाली मिलीं।
कई बसें सुबह से ही खड़ी होकर यात्रियों का इंतजार कर रहीं थी, लेकिन बस फुल नहीं हो रही थी। ड्राइवर और कंडक्टर यात्रियों को पुकार रहे थे। काफी देर तक यही सिलसिला चलता रहा। इसको लेकर बस ड्राइवर और कंडक्टरों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सुबह से बसें गंतव्य को जाने के लिए लाइन में लगकर खड़ी हैं, लेकिन यात्री ही नहीं आ रहे हैं।
हर पर्व पर खासकर होली और दीपावली पर बसें यात्रियों से खचाखच भरी रहतीं थी, लेकिन इस बार मुसाफिर आ नहीं रहे हैं। अमर उजाला टीम को बस स्टॉप पर हर तरफ सन्नाटा ही दिखा। कुछ यात्री परिसर और बसों में बैठे हुए जरूर मिले। जानकारों का कहना है कि ये वह यात्री थे, जिन्हें अपने काम के सिलसिले या फिर इमरजेंसी में गंतव्य तक जाना था।
डिपो के जिम्मेेदारों का कहना है कि यात्रियों की संख्या पिछले चार दिनों से लगातार कम होती जा रही है। उनका कहना है कि कोरोना की वजह से लोग यात्रा करने से बच रहे हैं। नौकरीपेशा और जिन्हें बहुत जरूरत है, वही सफर कर रहे हैं। विभागीय जानकारों की माने तो सामान्य दिनों में 20 से 22 हजार यात्री सीतापुर डिपो की बसों में सफर करते हैं, जबकि त्योहारों में ये आंकड़ा 25 हजार के पार हो जाता था।
इस बार त्योहार होने के बाद बसों में सफर करने वाले यात्रियों का आंकड़ा सामान्य दिनों के आंकड़े को भी छू नहीं सका है। होली पर्व होने के बाद भी पिछले चार दिनों से यात्रियों की संख्या 12 से 15 हजार के बीच में ही सिमट कर रह जा रही है। लगातार मुसाफिरों की घटती संख्या को लेकर निगम के जिम्मेदार चिंतित हैं।
लंबी दूरी वाले यात्री हुए कम
निगम के जिम्मेदारों का कहना है कि लगातार लांग रूट पर सफर करने वाले यात्रियों की संख्या कम हो रही है। बाहर जाने वाले नहीं आ रहे हैं। आने वालों की संख्या भी कम है। लोकल व नौकरीपेशा वाले नियमित यात्री आ रहे हैं। लोकल रूट पर चलने वाली बसें फुुल हो जाती हैं। लंबी दूरी वाली बसों में यात्री नहीं आ रहे हैं।
20 से 22 हजार यात्री सामान्य दिनों में सफर करते हैं। 25 हजार से अधिक यात्री त्योहारों में सफर करते हैं। वहीं, 26 मार्च को 12 हजार यात्री सीतापुर डिपो से चले। 10 हजार मुसाफिरों ने 27 मार्च को सफर किया। 10 हजार यात्रियों ने 28 मार्च को सफर किया। 12 हजार 500 मुसाफिरों ने 29 मार्च को सफर किया। 15 हजार यात्रियों ने 30 मार्च को सफर किया। इस बार होली में कोरोना के कारण मुसाफिरों की संख्या में काफी कमी आई है।
यात्रियों को लॉकडाउन का भी सता रहा डर
रोडवेज के जिम्मेदारों की माने तो इस बार त्योहार में बाहर से आने वालों की संख्या कम रही है, जो जहां है वहीं रुका हुआ है। उसे लगता है कि अगर कहीं चले गए तो लॉकडाउन न लग जाए और फिर वापस न आ पाएं। कुछ मालिकों ने काम करने वाले लोगों का पैसा भी रोक रखा है।
उन्हें लग रहा है कि अगर उनका कर्मी चला गया तो लॉकडाउन लगने के डर से वापस नहीं आएगा। जो लोग आ गए हैं, उन्हें भी चिंता सता रही है कि कहीं काम करने चले तो ऐसा न हो कि लॉकडाउन लगने पर फिर पहले की तरह फंस जाएं। इन्हीं सब वजहों को लेकर लोग आ-जा नहीं आ रहे हैं।
इस बार होली में बसों से सफर करने वालों की संख्या काफी कम है। यात्री बस स्टॉप पर नहीं आ रहे हैं। लंबी दूरी वाली बसों के मुसाफिरों की संख्या पिछले चार दिनों से लगातार घट रही है। कोरोना का खतरा और लॉकडाउन लगने की आशंका से लोग आ-जा नहीं रहे हैं। सामान्य दिनों की तुलना में पर्व पर भी यात्री नहीं निकले हैं।
- विमल राजन, एआरएम