माहे रमजान का आगाज हो चुका है। शासन के फरमान के बावजूद ग्रामीण इलाकों में रोजेदारों को सहरी व इफ्तार के वक्त बिजली नसीब नहीं हो पा रही है। इससे रोजेदारों को दिक्कतें उठानी पड़ रही है।
रोजेदार बदहाल बिजली व्यवस्था के लिए पावर कॉर्पोरेशन को जिम्मेदार मान रहे हैं। इसकी ठोस वजह भी है। शासन स्तर से स्पष्ट निर्देश है कि सहरी और इफ्तारी के वक्त बिजली कटौती न की जाए, लेकिन कॉर्पोरेशन के जिम्मेदार अफसर इस निर्देश को ताक पर रख दे रहे हैं।
करीब दस दिन पहले जिले के ग्रामीण क्षेत्रों का तय रोस्टर रात दो बजे से सुबह सात बजे तक था। जबकि सांय चार बजे से रात नौ बजे तक आपूर्ति मिलती थी। रमजान के मद्देनजर यह रोस्टर बेहद माकूल था। इसमें सहरी व इफ्तारी के वक्त रोजेदारों को बिजली मिल जाती थी।
पर रमजान शुरू होने के ठीक दो दिन पहले रोस्टर बदल दिया गया। मौजूदा रोस्टर सुबह सात बजे से सांय चार बजे तक का है। इससे न सहरी और न ही इफ्तारी के वक्त बिजली मिल पा रही है। इस रोस्टर में भी महज दो से तीन घंटे ही आपूर्ति मिलती है। वह भी किस्तों में। इस दौरान लोकल फाल्ट व ट्रिपिंग की समस्या बनी रहती है।