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इंतजाम न दवाई, डेंगू से लड़ने की तैयारी हवा-हवाई

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जिला अस्पताल में पर्चा बनवाने के लिए महिलाओं की लगी लंबी लाइन। (संवाद) - फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। वायरल फीवर व डेंगू के प्रकोप से लड़ने को जिला अस्पताल खुद हांफ रहा है। अस्पताल में इस समय न तो दवाई है और न ही मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड हैं। मरीज दवा काउंटर को छोड़कर मेडिकल स्टोरों से महंगी दवाएं ले रहे हैं। एक-एक बेड के लिए लोग जद्दोजहद करते हैं। कहने के लिए तो डेंगू वार्ड बना है लेकिन इस वार्ड में सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है। इससे मरीजों को इलाज कराने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है।
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वायरल फीवर व डेंगू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। जिला अस्पताल में इस समय ओपीडी में करीब ढाई हजार मरीज आ रहे हैं। सुबह आठ बजे से ही लंबी लाइनें लगनी शुरू हो जाती हैं। शनिवार को पर्चा काउंटर पर इस कदर भीड़ थी कि लोग मुख्य गेट तक लाइन में लगे हुए नजर आए। लेकिन इन मरीजों को अस्पताल से सुविधा मिलना मुश्किल हो रही है। अस्पताल खुद ही बीमार चल रहा है।
अस्पताल में इस समय कई जरूरी दवाओं का टोटा है। चिकित्सक तो पर्चे पर दवा लिख देते हैं, जब वह मरीज दवा काउंटर पर जाते हैं तो उन्हें दवा न होने की बात कहकर वापस कर दिया जाता है। इससे मरीज बाहर से महंगी दवाओं को खरीदने को मजबूर हैं। यह हालात पिछले एक सप्ताह से बने हुए है।
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यही हाल मरीजों के लिए बेड पाने का बना हुआ है। जिला अस्पताल की क्षमता 230 बेड की है। इस समय अस्पताल के सभी बेड फुल चल रहे हैं। डेंगू का प्रकोप धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। इसके लिए जिला अस्पताल में 10 बेड रिजर्व करने की बात कही जा रही है। लेकिन यह सिर्फ कागजों पर ही सीमित है। सभी मरीज मेडिकल ए व बी वार्ड में भर्ती किए जा रहे हैं।
इन दवाओं की कमी
जिला अस्पताल में इस समय आंख व नाक के ड्राप का स्टॉक समाप्त हो गया है। एंटी एलर्जी की दवा नहीं है। एंटी बायटिक भी नहीं है। सूत्रों का कहना है चिकित्सक एमसीवी एंटी बायटिक लिखते है। जबकि अस्पताल में दूसरी कंपनी की एंटी बायटिक है। ऐसे में यह दवा भी नहीं मिल पा रही है। इन हालातों में मरीज दवा पाने के लिए भटक रहे हैं।
मरीज बोल - नहीं मिली दवा
तुलसी का कहना है कि जिला अस्पताल सुबह दवा लेने आए थे। लेकिन यहां पर लंबी लाइन के बाद जब नंबर आया तो आधी दवा नहीं मिल सकी है। राज बहादुर ने बताया कि पर्चा काउंटर पर दवा न होने की बात कहकर वापस कर दिया गया है। पंकज का कहना है कि अस्पताल में बहुत भीड़ है। चिकित्सक ओपीडी में देर से आते है। दवा भी नहीं मिल पाती है।
महिला अस्पताल में भी फैली अव्यवस्था
जिला महिला अस्पताल भी बीमार हो गया है। वहां पर भी मरीजों की भीड़ है। अस्पताल में लिवर की जांच बंद है। 20 अगस्त से लिवर की जांच की मशीन खराब हो गई है। अल्ट्रासाउंड मशीन कई महीनों से खराब चल रही है। इससे अस्पताल आने वाली महिलाएं बाहर से जांच करवा रही हैं। जबकि गर्भवती को अल्ट्रासाउंड की सबसे अधिक जरूरत पड़ती है। लेकिन वह यहां पर सुविधा बंद चल रही है।
चिल्ड्रेन वार्ड में भी बढ़ी बच्चों की संख्या
जिला अस्पताल का चिल्ड्रेन वार्ड भी फुल होने की कगार पर है। जिला अस्पताल प्रशासन के मुताबिक वायरल फीवर का असर बड़ों के साथ बच्चों पर भी हो रहा है। रोजाना ओपीडी में 100 से अधिक बच्चे आ रहे हैं। जिनमें अधिकतर बुखार, जुकाम, सिर दर्द, पेट दर्द की समस्या के आते है। हालांकि, अस्पताल प्रशासन का कहना है, वायरल फीवर से अभी किसी भी बच्चे की मौत नहीं हुई है।
ओपीडी में नदारद रहते हैं चिकित्सक
जिला अस्पताल में इस समय जब भार अधिक बढ़ा है तो कुछ चिकित्सक लापरवाही भी बरत रहे है। शनिवार को 10.30 बजे सर्जन कक्ष के बाहर मरीज लाइन में लगे मिले। एक भी चिकित्सक मौजूद नहीं था। इसी तरह चर्म रोग विशेषज्ञ का कमरा भी बंद मिला। यहां पर भी मरीज खड़े हुए थे। मरीजों ने बताया, सुबह आठ बजे से लाइन में लगे हैं।
अभी तक चिकित्सक नहीं आए है। वहीं, डॉ. जेएन सिंह सुबह ओपीडी में मरीजों को देखने के बाद अस्पताल में भर्ती मरीजों का राउंड करते हुए दिखाई दिए। इस दौरान अगर कोई मरीज मेडिकल वार्ड में पहुंच जाता तो वह उसे निराश नहीं करते। भर्ती मरीजों को देखने के साथ ही अन्य मरीजों को भी देख लेते। वह दो बजे तक बराबर मरीजों को देखते रहे।
इस सीजन में अभी तक सात लोगों में डेंगू के लक्षण मिले हैं। इनका इलाज चल रहा है। डेंगू से किसी की भी मौत नहीं हुई है। इसकी रोकथाम के लिए जिला अस्पताल में 10 बेड रिजर्व कर दिए गए है। फॉगिंग कराई जा रही है। टीमें घर-घर जाकर मरीजों का चेकअप करके उनको दवाइयां दे रही हैं।
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- डॉ. मधु गैरोला, सीएमओ
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