सीतापुर। जिले के गोआश्रय स्थलों में 7909 बेजुबान संरक्षित हैं। इन्हें ठंड न लगे, इसके लिए शासन ने निर्देश दिए थे पर इनका पालन नहीं हो रहा है। अधिकतर स्थलों पर गोवंशों को ठंड से बचाव के उपाय नहीं किए गए हैं। संरक्षित मवेशी खुले में ठिठुर रहे हैं। इससे उनके बीमार होने के साथ ही मौत की भी आशंका है।
महमूदाबाद विकास खंड के ग्राम सेहारुखेड़ा में स्थित अस्थायी गोशाला में लगभग 250 गोवंश हैं। बारिश व धूप से बचाव के लिए टीन शेड पड़ा हुआ है, लेकिन ठंड से गायों के बचाव के लिए न तो टाट बोरा है और न ही बैठने के लिए पुआल। गोशाला के चारों ओर बाउंड्रीवाल नहीं है। महोली तहसील क्षेत्र के चडऱा गांव में चारागाह भूमि पर बनी अस्थायी गोशाला में ठंड से बचाव के समुचित संसाधन नहीं हैं। भूसा की व्यवस्था तो है, टाट-पट्टी की अव्यवस्था के चलते पशुओं को ठंड से बचाव के उपाय नहीं किए गए हैं।
बाउंड्रीवाल न होने से हवा चलने से ठंड लगने के साथ ही जंगली जानवरों का खतरा बना हुआ है। जालियां जगह-जगह उखड़ी हुई है। चडऱा प्रधान प्रतिनिधि मनोज त्रिवेदी ने बताया कि गोशाला में 124 गोवंश मौजूद हैं। जिनके खाने पीने की समुचित व्यवस्था है। जंगली जानवर व आवारा कुत्तों से बचाव के लिए उखड़ी जालियां दुरुस्त कराई जा रही हैैं।
तहसील क्षेत्र के बीडनपुर गांव में बनी अस्थायी गौशाला की दशा खराब है। गौशाला में 89 गोवंश है लेकिन ठंड से बचाव के पर्याप्त संसाधन नहीं है। ग्राम प्रधान सरोज कुमार ने बताया कि पिछले 10 माह से गौशाला के रखरखाव का पैसा नहीं मिला है। चार मजदूर लगे हुए हैं, जिनका भी पेमेंट नहीं कर पा रहे हैं। किसी तरीके से व्यवस्था कर चारा भूसा खरीदा है। ठंड बढ़ रही है। शीघ्र ही व्यवस्था करके टाट पट्टी भी खरीदेंगे। इसी प्रकार जिले अन्य क्षेत्रों की अधिकांश गोआश्रय स्थलों पर गोवंशों के लिए ठंड के उपाय नहीं किए गए हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में बने 54 गोआश्रय स्थल
जिले के ग्रामीण क्षेत्र में 54 गोआश्रय स्थल संचालित हैं। इनमें तीन स्थायी हैं। वहां 7217 मवेशी हैं। इसी प्रकार नगर पालिका क्षेत्रों में एक अस्थायी एवं सात स्थायी गोआश्रय स्थल हैं। यहां 692 गोवंश संरक्षित हैं। ब्लाक सकरन के कलीमापुर एवं कम्हरिया खुनखुन में संचालित आश्रय स्थल में जल भराव के कारण यहां के पशु दूसरी जगह स्थानांतरित किए गए हैं।
इनका करना है पालन
गोशालाओं में संरक्षित गोवंशों को ठंड से बचाने के लिए विभागीय निदेशक ने एडवाइजरी जारी की थी। इसके अनुसार सर्दियों में पशुओं को धूप में बांधना है। लेकिन ठंडी हवा से बचाव करना जरूरी है। पशुओं के बैठने के स्थान पर पुआल या कोई नर्म चीज डालनी है, जिससे सफाई आसानी से हो सके। ताजा पानी ही पिलाना हैं। जो अधिक गर्म या अधिक ठंडा न हो। पशुओं को बरसीम या अन्य हरा चारा खिलाने से पहले थोड़ा सूखा चारा खिलाया जाना हैं।
बरसीम आदि के चारे को सूखे चारे में मिलाकर खिलाना है। सर्दियों में रात के समय सूखा चारा खिलाना लाभदायक रहता है, इससे पशुओं का तापमान संयमित रहता है। संभव हो तो अलाव की व्यवस्था की जाए। समय-समय पर आश्रय स्थलों को विसंक्रमित किया जाना है। इसका अनुपालान करने के निर्देश सीडीओ एवं सीवीओ ने संबंधित अफसरों को दिए थे।
सभी गोआश्रय स्थलों पर ठंड से बचाव के उपाय किए जाएंगे। तमाम स्थानों पर पर्याप्त उपाय किए जा चुके हैं।
- डॉ. राम अचल, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी