चैत्र माह की प्रतिपदा के वासंतिक नवरात्र शुक्रवार से शुरू हो रहे हैं। नवरात्र को लेकर मंदिरों समेत घरों में सारी तैयारियां पूरी हो गई हैं। भक्तों ने मंदिरों की साफ-सफाई पूरी कर ली है। मंदिरों को फूल व बिजली की झालरों से सजा दिया गया है। अब नौ दिनों तक गली-गली में माता के जगराते होंगे।
वासंतिक नवरात्र के मद्देनजर गुरुवार को शहर के प्रसिद्ध आलमनगर दुर्गा मंदिर, संतोषी माता मंदिर, काली माता मंदिर, तरीनपुर रामलीला मैदान स्थित फूलमती माता मंदिर, नवदुर्गा मंदिर, राणी सती मंदिर,पंजाबी धर्मशाला आदि मंदिरों की सजावट को अंतिम रूप दिया गया। मंदिरों के आसपास फूलमालाओं की दुकानें भी सज गईं हैं।
पूजा स्थानों की साफ-सफाई के साथ ही पूजा-अर्चना में प्रयुक्त होने वाली सभी आवश्यक वस्तुएं जुटाई जाने लगी है। नैमिषारण्य में आदि शक्ति जगत जननी मां ललिता देवी मंदिर में इन दिनों सजावट कार्य जोरों पर है। यहां पर देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु मां ललिता देवी का दर्शन लाभ लेने आते हैं।
काली पीठ में भी नवरात्र की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यहां शनिवार को मां धूमावती के विशेष दर्शन हाेंगे। नैमिषारण्य के पौराणिक महत्व के दर्शनीय स्थल व्यासगद्दी, सूतगद्दी, हनुमानगढ़ी, देवपुरी आदि मंदिरों की साज-सज्जा को अंतिम रूप दिया जा रहा है। महमूदाबाद के संकटा देवी मंदिर को भव्यता देने का काम जोरों पर चल रहा है।
ऐसे करें कलश स्थापना
वासंतिक नवरात्र में मां का विधि-विधान से पूजन करने वाले हर व्यक्ति की मनोकामना पूर्ण होती है। पवित्र स्थान की मिट्टी से वेदी बनाकर उसमें जौ व गेहूं बोए। इसके बाद उसके ऊपर कलश को विधि पूर्वक स्थापित कर दें। कलश के ऊपर मूर्ति की प्रतिष्ठा करें। नवरात्र में हम जितनी पवित्रता बरतते हैं देवी उतनी ही प्रसन्न होती हैं।