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जरूरत के हिसाब से नहीं मिल रहीं दवाएं

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दवाई लेने के लिए लाइन में लगे मरीज व तीमारदार। -संवाद - फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। जिला अस्पताल में बढ़ते मरीजों के कारण जरूरी दवाओं का बीच में स्टॉक समाप्त हो रहा है। यह दवाएं कॉर्पोरेशन से समय पर नहीं मिल रही है। अगर सौ सीरप की डिमांड भेजी जाती है तो महज 60 सीरप ही आ रही है। इसकी वजह से कई बार मरीजों को बिना दवा के ही लौटना पड़ रहा है।
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जिला अस्पताल में इस समय रोजाना दो हजार से अधिक मरीज ओपीडी में आ रहे है। दवा काउंटर से पुराने व नये मरीज मिलाकर करीब 3500 को रोजाना दवाएं दी जा रही है। इतनी भारी तादाद में अस्पताल में मरीज आने से दवाओं का स्टॉक जल्द समाप्त हो रहा है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक अगर जरूरी दवाओं का स्टॉक एक सप्ताह के लिए मंगाया जाता है तो वह तीन दिन में समाप्त हो जाता है।
दो दिन पहले ही दवा की डिमांड कॉर्पोरेशन से कर दी जाती है लेकिन कॉर्पोरेशन से डिमांड के मुताबिक दवाएं नहीं मिल पा रही है। इस कारण बार-बार डिमांड भेजनी पड़ रही है। इससे कई बार मरीजों को बिना दवा के ही लौटना पड़ रहा है। अगर मरीज भर्ती है तो उन्हें बाहर से भी दवा खरीदनी पड़ जाती है।
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अधिकतर इन दवाओं की हो रही डिमांड
जिला अस्पताल प्रशासन के मुताबिक जिला अस्पताल में अधिकतर पेट में गैस के मरीजों को रेनटेक, उल्टी के लिए पेरीनार्म व लोहे से कटने पर टिटनेस का इंजेक्शन लगाया जाता है। इस समय अस्पताल में यह सभी मौजूद है। बुधवार को ओपीडी में दो बजे तक रेनटेक चार, 13 टिटनेस व 10 पेरीनार्म इंजेक्शन मरीजों को लगाए गए थे।
एक अनुमान के मुताबिक हर माह मरीजों को टिटनेस के करीब पांच सौ, पेरीनार्म के 300 व रेनटेक के 400 इंजेक्शन ओपीडी में ही जरूरत पड़ती है। इतनी अधिक डिमांड होने से अस्पताल को कॉर्पोरेशन से दवाएं मिलने में देरी होती है। इसके अलावा पेट दर्द के टेबलेट, एंटी एलर्जी, बुखार, पेट दर्द, कमजोरी आदि दवाओं की अधिक डिमांड रहती है।
करीब 30 हजार की होती है लोकल खरीद
जिला अस्पताल में जब दवाओं का स्टॉक समाप्त हो जाता है और कॉर्पोरेशन से दवाएं नहीं मिल पाती तो लोकल खरीद के जरिये ही दवाएं दी जाती है। प्रति माह 20 से 30 हजार तक की लोकल खरीद की जाती है। सूत्रों का कहना है कि लोकल खरीद तभी होती है, जब वीआईपी इलाज के लिए अस्पताल से दवाओं की डिमांड होती है तभी यह खरीदी जाती है। वरना कॉर्पोरेशन से दवाओं के आने का इंतजार किया जाता है।
एंटीबायोटिक के नहीं थे इंजेक्शन
करीब एक सप्ताह पहले जिला अस्पताल में एंटी बायोटिक के इंजेक्शन नहीं थे। जबकि यह इंजेक्शन अस्पताल में भर्ती मरीजों को सुबह शाम लगाए जाते है। इससे मरीजों को इंजेक्शन नहीं लग पा रहे थे। जबकि रोजाना इन इंजेक्शनों की करीब पांच सौ की डिमांड होती है। ऐसे में इन इंजेक्शनों की लोकल खरीद हुई थी। उसके बाद कॉर्पोरेशन से यह इंजेक्शन आ गए थे।
नहीं है कोई किल्लत
अस्पताल में जरूरी दवाओं की कोई किल्लत नहीं है। इंजेक्शन से लेकर सीरप व दवाएं मौजूद है। कभी कभार कॉर्पोरेशन से दवा मिलने में देरी हो जाती है तो मरीजों की सहूलियत के लिए लोकल खरीद कर इसे पूरा कर दिया जाता है।
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- डॉ. आरके सिंह, सीएमएस जिला अस्पताल
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