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मतदाताओं के मिजाज से उलझा गणित

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सीतापुर। मतदाताओं ने चुनावी दंगल में कूदे प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला बुधवार को दे दिया है। अब बारी नतीजों के जानने की उत्सुकता को लेकर है। हालांकि, परिणाम आने में अभी इंतजार करना होगा, लेकिन लंबे समय से बिछाई गई चुनावी बिसात से नेताओं को अपनी-अपनी जीत की आस जरूर है। हर सीट पर भाजपा और सपा को जीत के आसार हैं लेकिन मतदाताओं के मिजाज ने पूरी चुनावी गणित उलझा दी है।
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2022 विधानसभा चुनावी समर में जिले में इस बार 96 योद्धा चुनावी दंगल में उतरे, लेकिन मुख्य मुकाबला भाजपा और सपा के योद्धाओं के बीच ही रहा। हर सीट पर लड़ाई दो पर दो नजर आई। यही वजह है कि दल हों या उनके नेता, सभी को अपनी-अपनी जीत का पूरा भरोसा है। उन्हें अपनी रणनीति पर भी विश्वास है कि नतीजे उनके हक में ही आएंगे, लेकिन ऐसा होगा या नहीं... इस पर संशय बना हुआ है। अब परिणामों के बाद पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।
भाजपा को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद
2017 में मोदी लहर में नौ में सात सीटों सदर, महोली, लहरपुर, हरगांव, मिश्रिख, बिसवां, सेवता पर कब्जा जमाने वाली भाजपा को इस बार भी पहले से और बेहतर प्रदर्शन की आस है, लेकिन क्या ऐसा होता है, यह देखना अहम होगा। हालांकि, भाजपा के स्टार प्रचारकों ने तो दावे यही किए हैं।
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सपा को 2012 का प्रदर्शन करने की आस
मोदी लहर में महमूदाबाद सीट को बचाने में कामयाब रही समाजवादी पार्टी को इस बार 2012 का प्रदर्शन दोहराने की आस है। 2012 के चुुनाव में सपा ने सात सीटों पर कब्जा जमाया था। इस बार भी वही उम्मीद है, लेकिन यह उम्मीद कहां तक पूरी हो पाती है, यह देखना दिलचस्प होगा।
बसपा-कांग्रेस लड़ रही वजूद की जंग
इस बार के चुनाव में जिले में राजनीतिक तस्वीर इस बात की ओर इशारा कर रही कि बसपा और कांग्रेस वजूद की लड़ाई लड़ रही हैं। हालांकि, दोनों ही पार्टियों ने जातिगत फैक्टर को देखते हुए सियासी बिसात पर मोहरे बिछाए थे, लेकिन चुनाव में क्या कमाल कर पाएंगे या देखना होगा? फिलहाल अभी तो यही लग रहा है कि दोनों ही पार्टियां वजूद की जंग लड़ रही हैं।
आठ पर सीधी टक्कर, एक पर त्रिकोणीय
मतदान के बाद जिले की सियासी तस्वीर काफी हद तक साफ हो चुकी है। सियासत के चश्मे से देखे तो नौ विधानसभाओं वाले जिले की सात सीटों पर भाजपा और सपा के बीच ही कांटे की टक्कर है। एक सीट पर त्रिकोणीय, जबकि एक सीट पर भाजपा और सुभासपा है। सदर, महोली, हरगांव, लहरपुर, बिसवां, सिधौली, सेवता में लड़ाई भाजपा-सपा के बीच सिमट गई है, जबकि महमूदाबाद में भाजपा, सपा, बसपा और मिश्रिख में भाजपा-सुभासपा के बीच टक्कर है।
महंगाई, बेरोजगारी तो कहीं हिंदुत्व का मुद्दा भारी
अमर उजाला की टीम ने बुधवार को रामकोट, महोली, इमलिया सुल्तानपुर, कमलापुर से लेकर हरगांव तक मतदाताओं के मिजाज को परखने की कोशिश की। हमारी ग्राउंड रिपोर्टिंग बताती है कि मतदाताओं ने चुनावी कहानी में रोमांच का तड़का और भर दिया है। चुनावी बिगुल बजने के बाद से ही महंगाई, बेरोजगारी को लेकर मुखर रहे लोगों का मिजाज बुधवार को मतदान के दिन कुछ बदला दिखा। ऐसा नहीं था कि महंगाई और बेरोजगारी लोगों का मुद्दा नहीं था, लेकिन उससे कहीं ज्यादा हिंदुत्व, राम मंदिर, सुरक्षा का मुद्दा भी हावी दिखा।
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