सीतापुर। जिला अस्पताल में सोमवार को अचानक सेलेक्ट्रा मशीन खराब हो गई। इससे पैथोलॉजी की सुविधा पूरी तरह ठप हो गई। इसके चलते मरीजों की लिवर, किडनी, गुर्दा सहित करीब 25 जांच नहीं हो पाईं। करीब 400 मरीज बिना जांच के ही लौट गए। इमरजेंसी वाले मरीजों ने बाहर से जांच करवाईं। इसके बदले उन्हें काफी अधिक रुपये खर्च करने पड़े।
जिला अस्पताल की पैथोलॉजी सोमवार को बेपटरी हो गई। सुबह आठ बजे ओपीडी खुलते ही मरीजों की भारी भीड़ उमड़ी। मरीजों ने चिकित्सकों से परामर्श लिया। मरीजों को उनकी बीमारी के अनुसार जांच लिखीं। जब मरीज पैथोलॉजी पहुंचे तो उनका सैंपल नहीं लिया जा सका।
मरीजों ने बताया कि मशीन खराब होने की जानकारी दी गई। इससे मरीज बेहद परेशान रहे। राकेश ने बताया कि पेट फूल रहा है। चिकित्सक ने लिवर की जांच करवाने की सलाह दी थी। जांच नहीं हो पाई। प्राइवेट में जांच करवाने की जानकारी की तो पता चला कि 400 रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
राहुल ने बताया कि किडनी संबंधी दिक्कत है। पेशाब करने में परेशानी है। 20 किलोमीटर से चलकर आया हूं। घर से रुपये भी नहीं लाए थे। यहां जांच ठप है तो अब वापस जा रहा हूं। मंगलवार को फिर से जांच करवाने आना पड़ेगा।
राखी ने बताया कि डॉक्टर ने लिपिड प्रोफाइल की जांच करवाने की सलाह दी थी। पेट में एसिड अधिक बन रहा है। यह जांच प्राइवेट में 500 रुपये में हो रही है। मजबूरी में बाहर से जांच करवानी पड़ी। इसी तरह तमाम मरीज परेशान रहे। काफी इंतजार के बाद वह बिना जांच के ही लौट गए।
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2900 ने कराया इलाज
जिला अस्पताल में इस समय भीड़ उमड़ रही है। सोमवार को एक दिन की छुट्टी के बाद ओपीडी खुली तो करीब 2900 मरीज पहुंचे। दोपहर दो बजे तक चिकित्सकों के पास कतार लगी रही। सबसे अधिक भीड़ ईएनटी, फिजिशियन व हड्डी रोग विभाग में देखने को मिली। फिजिशियन कक्ष में आए ज्यादातर मरीज जुकाम, बुखार, खांसी, पेट दर्द व उल्टी-दस्त से परेशान थे। इसी तरह ईएनटी में कान में खुजली, दर्द, पानी निकलने की समस्या वाले अधिक मरीज थे।
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सही हो गई हैं मशीनें
दो मशीनें लगी हुई हैं, लेकिन ये दोनों खराब हो गई थीं। अब इन्हें दुरुस्त करवा दिया गया है। मंगलवार से जांच व्यवस्था पटरी पर आ जाएगी।
डॉ. इंद्र सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल