रामगढ़ (सीतापुर)। संदना थाना क्षेत्र में पिछले सात महीनों से दहशत का पर्याय बना आदमखोर तेंदुआ आखिरकार रविवार रात पिंजड़े में कैद हो गया। वन विभाग ने खेवटा रामपुर गांव के करीब पिंजड़ा रखा था। तेंदुआ जैसे ही उसमें बकरी का शिकार करने के लिए घुसा कैद हो गया। सुबह तेंदुए की दहाड़ सुनकर सैकड़ों की संख्या में लोग उसे देखने पहुंच गए। वन विभाग ने तेंदुए को पिंजड़े समेत ट्रेक्टर-ट्रॉली पर लादकर रवाना किया। तेंदुए को लखीमपुर के काशीपुर वन क्षेत्र में छोड़ा जाएगा।
संदना थाना इलाके में बीते सात माह से एक तेंदुआ चहलकदमी कर रहा था। शिकार की तलाश में कभी वह आबादी के करीब पहुंच जाता, तो कभी खेत में नजर आता था। इस दौरान सैकड़ों मवेशियों का तेंदुए ने शिकार किया। कुछ ग्रामीणों पर भी हमला किया लेकिन किसी तरह वह बच गए। विगत 17 अक्तूबर को क्षेत्र के जगदीशपुर निवासी मुर्तजा (52) पुत्र नूर मोहम्मद को तेंदुए ने उस समय निवाला बना लिया जब वह शौच के लिए गांव के बाहर खेतों की ओर गए थे।
उसके शव के अवशेष मिले थे। इसके बाद इलाके में आदमखोर तेंदुआ दहशत का पर्याय बन गया। लगातार कांबिंग के बाद भी वन विभाग उसका कोई सुराग नहीं लगा पा रहा था। फिर उसे पकड़ने के लिए जगदीशपुर गांव के निकट पिंजड़ा लगाया। तेंदुए की सक्रियता लगातार बढ़ने से एक माह पूर्व खेवटा रामपुर गांव के पास भी पिंजड़ा लगाया गया। एक माह तक तेंदुआ वन विभाग को चकमा देता रहा।
शनिवार की रात शिकार की तलाश में तेंदुआ पिंजड़े के पास आया लेकिन उसमें बकरी नहीं होने से वापस जंगल लौट गया। रविवार सुबह पग चिह्न देख वन विभाग ने पिंजड़े में बकरी बांधी। रविवार रात बकरी की आवाज सुनकर तेंदुआ वहां पर पहुंच गया। बकरी को शिकार बनाने के लिए जैसे ही तेंदुआ पिंजड़े में दाखिल हुआ, पिंजड़े का गेट बंद हो गया। इससे तेंदुआ पिंजड़े में कैद होकर रह गया। सोमवार की सुबह तेंदुए की दहाड़ व गर्जना सुनकर ग्रामीणों की नींद खुली।
सूचना मिलते ही डीएफओ रुस्तम परवेज, एसडीओ एके मिश्र, रेंजर लाइक अहमद, फॉरेस्टर एसएन शुक्ल, अनिल सिंह, डीडी बघेल मौके पर पहुंचे। इसके बाद पिंजड़े को ग्रामीणों की मदद से ट्रैक्टर-ट्राली पर लोड करके भेजा गया। इधर, तेंदुआ पकड़े जाने की सूचना मिलने के बाद क्षेत्र के हजारों ग्रामीण मौके पर पहुंच गए, जो तेंदुए की एक झलक पाने को बेताब नजर आ रहे थे। ग्रामीणों को पिंजड़े से दूर रखने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। तेंदुआ पकड़े जाने से क्षेत्र के नागरिकों ने सुकून की सांस ली है।
लकड़बग्घे ने बछड़े को बनाया निवाला
तेंदुआ तो पकड़ में आ गया, लेकिन लकड़बग्घे ने अभी इलाके में आतंक मचा रखा है। एक माह में लकड़बग्घे ने तीन मवेशियों को अपना निवाला बना लिया है। पहले तो खेवटा रामपुर के सर्वेश के बछड़े को लकड़बग्घे ने अपना निवाला बनाया। दूसरी बार गाय को अपना निवाला बनाया। रविवार रात महेंद्र के बछड़े को लकड़बग्घे ने निवाला बना लिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि अब हम अपने जानवर कहां बांधने जाएं। आए दिन लकड़बग्घे द्वारा मवेशियों को अपना निवाला बना लिया जाता है।
बिना ट्रेंकुलाइज ट्रॉली पर चढ़ाया पिंजड़ा
इसे संसाधनों की कमी कहें या वन विभाग की लापरवाही कि तेंदुए को ट्रेंकुलाइज किए बगैर ही पिंजड़ा ट्राली पर चढ़ाया गया। इसके लिए ग्रामीणों की मदद भी ली गई। पिंजड़े को पन्नी से ढक जरूर दिया। लेकिन तेंदुए की दहाड़ से लोग भयभीत दिखाई दिए। पिंजड़े में फंसे तेंदुए की दहाड़ इलाके में एक किमी तक गूंज रही थी।