सीतापुर। लहरपुर ब्लाॅक की कृषि सखी सरिता बेहतर खेती कर दूसरों के लिए नजीर बन गई हैं। वह खुद के साथ अन्य किसानों और विद्यार्थियों को जैविक खेती करने के लिए जागरूक कर रही हैं। पोषण वाटिका और सेहत से जुड़ी जानकारियां भी उपलब्ध करा रही हैं, जिससे घर में ही पौष्टिक हरी सब्जियां उपलब्ध हों। इससे किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। सरिता जैविक खाद बनाने का प्रयोगात्मक प्रशिक्षण भी देती हैं।
लहरपुर के लालपुर गांव निवासी कृषि सखी सरिता जायसवाल ने स्नातक तक शिक्षा प्राप्त की है। वह एक एकड़ खेत में गेहूं, धान, गन्ना, सब्जी, पोषण वाटिका आदि की खेती करती हैं। इससे उन्हें प्रति एकड़ दो से ढाई लाख रुपये तिमाही का लाभ हो रहा है। वह किसानों को प्राकृतिक व जैविक पद्धतियों के बारे में प्रशिक्षित कर रही हैं। किसानों को जीवामृत, बीजामृत, दशपर्णी, पंचगव्य और केंचुआ खाद तैयार करने के लिए प्रयोगात्मक प्रशिक्षण भी दे रही हैं। वह कॉलेज में विद्यार्थियों को भी पोषण वाटिका और सेहत से जुड़ी जानकारियां उपलब्ध करा रही हैं।
सरिता ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र कटिया में प्रशिक्षण लेने के बाद उनके मन में कुछ नया करने का हौसला जगा। सरिता लगातार वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में किसानों को रसायन मुक्त खेती व पर्यावरण संरक्षण के साथ साथ फसल लागत कम करने की तकनीकों के प्रति जागरूक कर रही हैं। गांव में लगातार बढ़ती बीमारियां व अचानक मौत के साथ दूषित खान-पान को ध्यान में रखते हुए वह अपने आसपास के गांव बरेती जलालपुर, ढखेरा, रंगवा रौसीपुर, अतरौरा, केदार टाडां, सुल्तानपुर, सिंघनापुर और सोनारीपुर में किसानों, महिलाओं और युवाओं को पर्यावरण हितैषी तकनीक से रूबरू करा रही हैं।