सीतापुर। जिन अनुपयोगी चीजों को कबाड़ समझकर लोग फेंक देते हैं। रफत उन्हें सजावट की आकर्षक वस्तुओं में बदल देती हैं। रफत ने अपना आशियाना कबाड़ से बनी चीजों से सजा दिया है। घर की सजावट और बेकार वस्तुओं से हस्तनिर्मित सजावटी सामग्री हर किसी का मन मोह लेती है
शहर के कजियारा निवासी रफत जहीर को यह हुनर ऊपरवाले से बतौर नेमत मिला है। बचपन में जब बच्चों का मन खिलौनों में लगता है उसी उम्र में रफत ने अपना हुनर तराशना शुरू कर दिया था। रफत बताती हैं कि बचपन में एक बार शीशा टूटा तो बहुत बुरा लगा। कांच के टुकड़ों काे फेंकने के बजाय वह उन्हें जोड़ने में जुट गई। शीशे के टुकड़ों को जोड़कर उन्होंने एक गुड़िया बना डाली।
इसके बाद बेकार चीजों को सजावट की सामग्री बनाना शुरू कर दिया। पहले शौक फिर यह उनका जुनून बन गया। पुराने अनुपयोगी कपड़े, टूथ पेस्ट के डिब्बे, बाइक व साइकिल का लोहे वाला कबाड़, फटा-पुराना टाट आदि कई बेकार चीजों को रफत आर्टिफिशियल ज्वैलरी, कैरी बैग, ट्री, घोंसला व चिड़िया समेत कई तरह की सजावटी वस्तुएं बना देती हैं। इस हुनर ने उन्हें एक नई पहचान दी है।
बेहतरीन कलाकृतियां भी बनाती हैं रफत
बेकार चीजों से सजावट की वस्तुएं ही नहीं रफत बेहतरीन कलाकृतियां भी बनाती हैं। पेंसिल व ब्रश थाम कर जब रफत की अंगुलियां सादे कागज पर जुंबिश करती हैं तो मन को लुभाने वाली कलाकृति बन जाती हैं। फूल को निहारती बच्ची, गुड़िया से खेलती बच्ची, सिर पर मटकी रखे युवती और गोद में बच्ची लेकर जाती महिला समेत कई तरह की कलाकृतियां उन्होंने उकेरी हैं।
प्रशासनिक मदद मिले तो लड़कियों के रोजगार का बनाना चाहतीं जरिया
रफत बताती हैं कि वे इस कला को आगे बढ़ाना चाहती हैं। अगर उन्हें किसी भी तरह की प्रशासनिक मदद मिलती है तो वो शहर कि लड़कियों तक इस कला को पहुंचना चाहती हैं ताकि वे भी अपने घरों को सजाने के लिए बाजार का रुख ना करें बल्कि खुद ही सब कुछ बना लें। इसके अलावा जरूरतमंद महिलाएं व लड़कियां यह हुनर सीखकर इसे रोजगार का जरिया भी बना सकती हैं।