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प्रदेश का भविष्य गढ़ रहा जवाहर लाल नेहरू पाॅलीटेक्निक: डॉ. अम्मार

Sat, 18 Apr 2026 11:58 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
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महमूदाबाद (सीतापुर)। पूर्व कार्यवाहक मुख्यमंत्री डाॅ. अम्मार रिजवी ने कहा कि किसी भी संस्थान की तरक्की तभी होती है, जब वहां से पढ़कर निकलने वाले छात्र देश-विदेश में नाम रोशन करते हैं। जवाहर लाल नेहरू पाॅलीटेक्निक ने 50 वर्ष में कई ऐसे मेधावी दिए जो कई क्षेत्रों में विभिन्न पदों पर सेवाएं दे रहे हैं। मुझे गर्व होता है कि मैंने ऐसे संस्थान की नींव रखी, जिसने इस क्षेत्र में पूरे प्रदेश का भविष्य गढ़ने का काम किया है। इस पाॅलीटेक्निक ने महमूदाबाद के विकास के रास्ते खोले हैं।
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पूर्व कार्यवाहक मुख्यमंत्री शनिवार को जवाहर लाल नेहरू पाॅलीटेक्निक में स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 1975 में इस संस्थान की स्थापना की गई थी। तब वह प्रदेश के शिक्षा मंत्री थे। उनके प्रस्ताव पर ही महमूदाबाद में पॉलीटेक्निक की स्थापना को तत्कालीन मुख्यमंत्री ने मंजूरी दी थी। महज दो टिनशेड में शुरू हुए संस्थान में आज आठ कोर्स चल रहे हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विधायक आशा मौर्या ने कहा कि महमूदाबाद के विकास को लेकर भाजपा सरकार तत्पर है। महमूदाबाद में रोजगार के लिए औद्योगिक पार्क की स्थापना की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
कार्यक्रम में छात्रा शिप्रा, समृद्धि पांडेय, आराध्य पटेल, ओजस्वी वर्मा, श्रेया वर्मा ने सरस्वती वंदना और शिप्रा, वंदना, आराध्या, पारमिता ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत प्रधानाचार्य सीपी त्रिपाठी, सांस्कृतिक प्रमुख मेराज फात्मा, अंजुम फात्मा, मनीषा पाठक, एके सिंह, ज्योति कुमार, अपेक्षित राज आदि ने माल्यार्पण और बुके देकर किया। छात्र हार्दिक शुक्ल, परमेंद्र गुप्ता, आराध्य बाल शंकर, ज्योति राजपूत, अंशिता वर्मा ने सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा गीत प्रस्तुत किया। संचालन शरद मिश्र ने किया। इस अवसर पर रमेश वाजपेयी, डॉ. सीमा सिंह, सुरेश वर्मा, अनवार हुसैन, वेद श्रीवास्तव, कमल वर्मा आदि मौजूद रहे।
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पुरातन छात्रों को किया गया सम्मानित
समारोह के कोआर्डिनेटर और पूर्व छात्र पीएन वालिया ने पुरातन छात्रों का परिचय कराया। कार्यक्रम में 1975 के प्रथम कृषि इंजीनियरिंग बैच और 1976 के इलेक्ट्राॅनिक्स इंजीनियरिंग बैच के पूर्व छात्रों को सम्मानित किया गया। सेवानिवृत्त अध्यापक जगत नरायण, एके जौहरी और संजीव अवस्थी ने अपने अनुभव साझा किए।
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