सीतापुर। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले नौनिहालों के अभिभावकों के लिए जरूरी खबर है। अगर उनका बैंक खाता आधार से सीडेड नहीं है तो बच्चे को डायरेक्ट बेनीफिट स्कीम का लाभ नहीं मिलेगा। अभिभावकों को समय दिया गया है कि वह 15 दिन के अंदर बैंक जाकर इसे चेक करवाते हुए सीडेड करवा दें। एक माह के अंदर जल्द ही पहली चरण में नौनिहालों को लाभान्वित होने की उम्मीद है।
परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले नौनिहालों को प्रत्येक साल डीबीटी का लाभ दिया जाता है। प्रति नौनिहाल 1200 रुपये का बजट दिया जाता है। इससे वह जूते-मोजे, यूनिफॉर्म, स्कूल बैंक व स्टेशनरी खरीदते हैं। यह रकम सीधे अभिभावकों के खातों में भेजी जाती है।
चालू शैक्षिक सत्र 2024-25 के लिए कवायद शुरू हो गई है। नया सत्र शुरू हुए 25 दिन बीत गए हैं। ऐसे में अब पहले चरण में इनको लाभान्वित करने की कवायद तेज हो गई है। पिछले साल कई नौनिहाल इससे वंचित रह गए थे। कारण यह था कि अभिभावकों के खाते आधार से सीडेड नहीं थे।
इस समस्या को देखते हुए बीएसए ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। अभिभावकों को 15 दिन का समय दिया गया है कि वह इस अवधि में अपने बैंक खाते आधार से सीडेड करवा लें। अगर खाता चालू नहीं है तो उसे चालू करवा दें। अगर यह प्रक्रिया नहीं अपनाते हैं तो उन्हें डीबीटी का लाभ नहीं दिया जाएगा। उम्मीद है अगले महीने पहले चरण के नौनिहालों को इसका लाभ दिया जाएगा।
अभिभावक पहले चेक कर लें डाटा
नौनिहालों को डीबीटी का लाभ देने के लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है। पिछले साल के नौनिहालों का डाटा अपडेट कर दिया गया है। अगर इस डाटा में कोई गड़बड़ी होती है तो नौनिहाल इससे वंचित होंगे। इसलिए अभिभावक स्कूल से संंपर्क करके अपने नौनिहाल का डाटा चेक कर लें। अगर कोई दिक्तत है तो उसे प्रधानाध्यापक संशोधित करवाएंगे। इसके बाद बीईओ के माध्यम से यह बीएसए के पास डाटा पहुंच जाएगा।
बीआरसी से निशुल्क बनवाएं आधार कार्ड
कक्षा एक में दाखिला लेने वाले नौनिहालों के पास अभी आधार कार्ड नहीं होगा। साथ ही अगर नौनिहाल अपने डाटा में कोई संशोधन करवाना चाहते हैं तो उनके लिए समय है। बीआरसी के माध्यम से वह अपना आधार कार्ड बनवा सकते हैं। प्रत्येक बीआरसी पर इसकी सुविधा मौजूद है। इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
चालू करवा ले खाता
अभिभावक अपने खाते सक्रिय करते हुए आधार से सीडेड करवा ले। अगर खाता चालू होगा तो आराम से डीबीटी की राशि पहुंच जाएगी।
अखिलेश प्रताप सिंह, बीएसए