सीतापुर। जिले के 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को बूस्टर डोज लगवाने के लिए करीब 90 किलोमीटर की दौड़ लगानी पड़ेगी। कारण यह है कि जिले में बूस्टर डोज लगाने के लिए अभी कोई भी टीकाकरण केंद्र तय नहीं किये जा सके हैं। इन हालातों में लखनऊ पहुंचने पर ही बूस्टर डोज मुनासिब हो सकेगी। कारण यह है जिले में किसी भी प्राइवेट अस्पताल ने टीकाकरण कराने के लिए हामी नहीं भरी है।
स्वास्थ्य विभाग के पास एक भी आवेदन नहीं आए हैं। इन हालातों में अगर कोई बूस्टर डोज लगवाना चाहता है तो उसे लखनऊ तक की भागदौड़ करनी पड़ेगी। इससे करीब 90 किलोमीटर का सफर तय करके ही उसे बूस्टर डोज लगवा सकेंगे। मालूम रहे कि 10 अप्रैल से 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को बूस्टर डोज लगाने की शुरुआत हो चुकी है। इस बार बूस्टर डोज लगवाने के लिए लोगों को खुद ही टीके पर आने वाले खर्च को वहन करना पड़ेगा।
इसके लिए सरकार ने 250 रूपये प्रति टीके का रेट तय कर दिया है। अधिकतर अस्पताल 150 रूपये तक का सर्विस चार्ज ले सकते हैं। यह टीकाकरण निजी केंद्रों पर किया जाएगा। बूस्टर डोज उन्हीं लोगों को लगेगी, जिनको दूसरी डोज लगे हुए नौ माह बीत गए हैं। लेकिन जिले में अभी तक इस टीकाकरण की शुरुआत नहीं हो सकी है। एसीएमओ डॉ. पीके सिंह ने बताया कि जिले में बूस्टर डोज लगाने के लिए किसी भी प्राइवेट अस्पताल ने अभी तक आवेदन नहीं किया है। इसी वजह से बूस्टर डोज की शुरुआत नहीं हो पा रही हैं।
कोविड टीकाकरण को लेकर जिले में प्राइवेट अस्पतालों की भूमिका बहुत ही बेहतर नहीं रही है। इससे पहले की बात की जाए रेखा आई हॉस्पिटल व हिन्द अस्पताल अटरिया को कोविड टीकाकरण करने की अनुमति दी गई थी। लेकिन इन अस्पतालों ने कोविड टीकाकरण करने में बहुत दिलचस्पी नहीं दिखाई। अधिकतर लोगों ने सरकारी अस्पतालों में ही जाकर अपना टीकाकरण करवाया है। अब बूस्टर डोज लगने की बारी है तो भी निजी अस्पताल संचालकों द्वारा लापरवाही बरती जा रही है।