दधीचि कुंड में मछलियों की मौत - संवाद
मिश्रिख। प्राचीन दधीचि कुंड में बृहस्पतिवार को सैकड़ों मछलियों की मौत हो गई। इससे पहले भी कई बार मछलियां मर चुकी हैं। पानी में ऑक्सीजन की कमी व प्रदूषण से मछलियों की मौत होती है। यह सिलसिला दशकों से चला आ रहा है। इसके बाद भी जिम्मेदारों की ओर से समस्या का स्थायी समाधान नहीं कराने से श्रद्धालुओं में आक्रोश है।
मानसून शुरू होने पर हर साल दधीचि कुंड में सैकड़ों मछलियों की मौत हो जाती है। इस साल भी बारिश की शुरुआत में ही मछलियों की मौत ने एक बार फिर कुंड की बदहाली की पोल खोल दी है। सुबह लोगों ने कुंड में बड़ी संख्या में मरी मछलियां देखीं तो वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया। तीर्थ के पुजारी राहुल शर्मा ने बताया कि हर वर्ष पहली बारिश के बाद कुंड की मछलियां मर जाती हैं। उन्होंने कहा कि समय रहते उचित प्रबंधन व कुंड की सफाई न होने से मछलियों की मौत होती है।
मिश्रिख निवासी अमरीश शुक्ल के मुताबिक, कुंड में लगी फिल्टर की दोनों मशीनें लंबे समय से खराब हैं। लाखों की लागत से लगाई गईं केमिकल टंकियां भी वर्षों से बंद हैं। ऑक्सीजन की कमी व पानी दूषित होने से मछलियां मर रही हैं। जलनिकासी की समस्या भी जस की तस है। कई अधिकारी और नेताओं ने वादा किया था कि जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था की जाएगी, लेकिन स्थिति जस की तस है। धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले महर्षि दधीचि कुंड की दयनीय हालत पर लोगों ने रोष जताते हुए कुंड की नियमित सफाई, फिल्टर मशीनों की मरम्मत और जल संरक्षण की स्थायी व्यवस्था कराने की मांग की है।
डीएम से मिलकर बताएंगे समस्याएं
विमलानंद महाराज ने बताया कि महर्षि दधीचि कुंड इस समय दुर्दशा का शिकार है। साफ-सफाई की व्यवस्था बेपटरी है। शौचालय की व्यवस्था भी बदहाल है। इन समस्याओं को लेकर जल्द ही जिलाधिकारी से मिलकर समाधान कराने की मांग उठाई जाएगी।
उठाए जा रहे आवश्यक कदम
दाधीचि कुंड में चूना और पोटाश डलवाकर पानी को साफ करने का प्रयास किया गया है। मछलियों को बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। संबंधित विभाग को भी जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
-अभिनव यादव, एसडीएम मिश्रिख