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कोरोना का असर : होली परिक्रमा मेले में पसरा सन्नाटा

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मिश्रिख मेले में पसरा सन्नाटा। - फोटो : SITAPUR
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मिश्रिख (सीतापुर)। प्राचीन होली परिक्रमा मेला पर लगातार कोरोना का साया गहराता जा रहा है। सांस्कृतिक कार्यक्रम पहले ही निरस्त हो चुके हैं। मेलार्थियों के नहीं पहुंचने से दिनभर सन्नाटा पसरा रहता है। पिछले वर्षों के मुकाबले करीब 80 फीसदी तक कारोबार घट गया है। रही सही कसर पालिका प्रशासन की अनदेखी ने पूरी कर दी है।
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मेला परिसर में गंदगी व जलभराव के कारण भी लोग आने से कतरा रहे हैं। इन हालातों में दुकानदारों को जमीन का किराया तक निकालना मुश्किल हो रहा है। पौराणिक होली परिक्रमा मेला इस बार कोराना वायरस के संक्रमण की आशंका का शिकार हो गया है। शासन के फरमान पर कोरोना का हवाला देते हुए प्रशासन की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम पहले ही रद्द किए जा चुके हैं। अब कोरोना की दहशत का असर मेले पर भी नजर आ रहा है।
मेला प्रांगण में पिछले वर्षों के मुकाबले लोग काफी कम पहुंच रहे हैं। आंधी-पानी के बाद जलभराव व गंदगी के कारण भी लोग आने से कतरा रहे हैं। लिहाजा, दिनभर मेले में सन्नाटा पसरा रहता है। कई वर्षों से मेले में दुकान लगाने वाले कारोबारियों को इस बार नुकसान उठाना पड़ रहा है। पालिका 10 फीट जमीन का किराया 4440 रुपये वसूलती है।
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दरी, कपड़ा, बर्तन, झूला आदि के दुकानदारों को काफी जमीन की जरूरत होती है। जमीन के किराए के साथ अन्य कई तरह के खर्चे होते हैं। इस बार मेले में सन्नाटा होने से दुकानदारों का खर्च निकलना भी मुश्किल है। भारी नुकसान को लेकर दुकानदार मायूस हैं।
कोरोना व गंदगी से मेले पर पड़ा असर
कानपुर के नौबस्ता में रहने वाले दीनानाथ पिछले कई वर्षों से मेले में दरी, कालीन की दुकान लगाते आ रहे हैं। दीनानाथ बताते हैं कि कोरोना के कारण सांस्कृतिक कार्यक्रम रद्द होने का असर मेले पर पड़ा है। दहशत में लोग नहीं आ रहे हैं। पालिका प्रशासन की अनदेखी से जलभराव व गंदगी ने रही सही कसर पूरी कर दी। इस बार भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किराया व खर्च निकालना मुश्किल
मेला में चादर व कंबल की दुकान लगाने वाले कानपुर निवासी कल्लू बेहद मायूस है। पूछने पर बोले नाम मात्र के लोग मेला देखने आ रहे हैं। ऐसे में बिक्री नहीं हो रही है। पिछले वर्षों की तुलना में लगभग 80 फीसदी कारोबार प्रभावित हुआ है। जमीन का किराया व अन्य खर्च तक नहीं निकल पा रहे है। मेला प्रशासन ने जब सांस्कृतिक कार्यक्रम निरस्त कर दिए तो दुकानदारों से वसूली गई धनराशि में से आधी तो वापस करनी चाहिए।
बर्तन व्यवसायी अशोक शुक्ल ने बताया, इस बार पिछले वर्ष के सापेक्ष 20 फीसदी दुकानदारी हुई है। भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, लेकिन मेला प्रशासन को इससे कोई लेना-देना नहीं है। मेला बाइलाज के मुताबिक तीन साल तक जमीन का किराया नहीं बढ़ाया जा सकता, यहां हर साल किराया बढ़ाया जा रहा है। मेले में पसरा सन्नाटा देखकर भी दुकानदारों को कोई रियायत नहीं दी जा रही है।
मेला में इलेक्ट्रिक झूला, ट्रेन, काला जादू समेत कई तरह के कारोबार करने वाले अकील खां को इस बार लाखों का घाटा हुआ है। अकील ने बताया, कई आइटम होने से करीब साढ़े छह लाख रुपये की रसीद कटी थी। मेला में सन्नाटा होने से कारोबार पर सुस्ती छाई है। कोरोना के अलावा जलभराव व गंदगी से भी मेला प्रभावित हुआ है।
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