राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के आह्वान पर बुधवार को स्वास्थ्य महकमे में कर्मचारी हड़ताल पर रहे। इस दिन सुबह आठ से ग्यारह बजे तक कार्य बहिष्कार से अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं। हालांकि इस दौरान अपरेंटिस छात्र-छात्राओं ने इनकी जगह पर मोर्चा संभाल कर इमरजेंसी सेवाओं को बहाल रखा।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने मांगे न माने जाने पर तीन दिवसीय हड़ताल का एलान कर रखा है। परिषद के आह्वान पर जिले भर के सरकारी अस्पतालों के कर्मचारी कार्य बहिष्कार कर हड़ताल पर चले गए। ये कर्मचारी सुबह आठ बजे से ग्यारह बजे तक हड़ताल पर रहे।
इससे विभिन्न वार्डों में भर्ती मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालांकि इनकी हड़ताल में चिकित्सक शामिल नहीं थे। इससे अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को डॉक्टर देखते रहे और दवाएं लिखते रहे। इमरजेंसी सेवा हड़ताल से बाहर थी, जिसमें मरीजों को देखा जाता रहा और गंभीर रोगियों को भर्ती भी किया गया।
इस दौरान विभिन्न वार्डों के मरीजों का कहना था कि तीन घंटे की हड़ताल से उनकी ग्लूकोज की बोतलें नही बदली गई, वहीं इंजेक्शन भी नहीं लग सका। स्वास्थ्य सेवा 11 बजे के बाद दोबारा पटरी पर लौटी।
संयुक्त परिषद के संयोजक डॉ. आरके मिश्र व इंजीनियर डीबी सिंह ने बताया कि हमारी मांग है कि राज्य कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों की तरह भत्तों की समानता प्रदान की जाए। नई पेंशन व्यवस्था को समाप्त करते हुए पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल की जाए।
उधर, इमलिया सुल्तानपुर प्रतिनिधि के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एलिया में संघ के जिला महामंत्री मनोज दीक्षित के नेतृत्व में तीन घंटे तक कार्य बहिष्कार कर प्रदर्शन किया गया।