निर्मलपुरवा का शिव मंदिर मंगलवार रात घाघरा के सैलाब में बह गया। यही नहीं दुर्गा पुरवा को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाली सड़क का अधिकांश हिस्सा भी कट गया। करीब 150 मीटर सड़क को नदी निगल गई है। जिसके बाद पानी अब दुर्गापुरवा गांव को घेरने लगा है।
कटान से कोनी व दुर्गापुरवा में मौजूद करीब 300 परिवार फंसे हैं। जबकि टापू पर बसे पचीसा गांव के 13 मकान कट गए। डीएम अमृत त्रिपाठी ने बाढ़ग्रस्त इलाके में पहुंचकर हालात देखा। उधर, बुधवार को बैराजों से सवा दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। बाढ़ग्रस्त गांवों में फंसे ग्रामीणों के पास राशन खत्म हो चुका है। ऐसे में अब बाढ़ पीड़ित भूख से जूझ रहे हैं।
इन दिनों घाघरा दुर्गा पुरवा के निकट कटान कर रही है। वहीं निर्मल पुरवा गांव में बचे इकलौते शिव मंदिर को भी मंगलवार रात नदी लील गई। हालांकि कटान को देखते हुए भक्तों ने मंदिर में मौजूद प्रतिमाओं को पहले ही निकाल लिया गया था। घाघरा का पानी सड़क के करीब 150 मीटर हिस्से को बहा ले गया है।
इस मार्ग के कटने से कोनी व दुर्गा पुरवा गांव के लोग फंस गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि या तो प्रशासन सड़क दुरुस्त करा दे या परिवारों को निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दे। अधिकांश परिवारों के घरों में राशन नहीं बचा है और न ही प्रशासन की तरफ से यहां पर भोजन की व्यवस्था की गई है।
बाढ़ में फंसे लोग लोग भूखे हैं। उधर, जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी बाढ़ प्रभावित रामलाल पुरवा गांव और गांव के हालात देखे। डीएम ने अधीनस्थों को बाढ़ पीड़ितों की मदद के निर्देश दिए। दूसरी तरफ नदी टापू पर बसे पचीसा गांव में भी कटान कर रही है। तटीय क्षेत्र के ग्रामीणों की माने तो बाढ़ के पानी का स्तर बढ़ता ही जा रहा है।
यहां 13 मकान कट गए। दूसरी तरफ रामपुर मथुरा इलाके में भी बाढ़ का कहर जारी है। इस क्षेत्र के करीब 48 गांव बाढ़ की जद में हैं। उधर शारदा व घाघरा बैराजों से बुधवार को 226813 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। ऐसे में बाढ़ की मुसीबत अभी टलती नजर नहीं आ रही हैं।