संदना। आधुनिक संसाधनों से लैस वन विभाग की टीम किसान को निवाला बनाने वाले बाघ का पता लगाने में छठे दिन भी नाकाम रही। ड्रोन व ट्रैप कैमरों की कमांड सेंटर से निगरानी बेनतीजा साबित हो रही है। रोजाना अलग-अलग स्थानों पर उसके पगचिह्न मिल रहे हैं। सोमवार को गेंधरिया में फिर ताजा पगचिह्न पाए गए हैं।
बाघ के हमले में किसान कमल किशोर की मौत के छठे दिन सोमवार को भी वन विभाग का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहा। सोमवार सुबह गेंधारिया गांव के पास खेतों में बाघ के ताजा पगचिह्न पाए गए। रोजाना मिल रहे बाघ के पगचिह्नों से स्पष्ट है कि वह इलाके में तीन किमी के दायरे में चहलकदमी कर रहा है। इसके बाद भी वन विभाग का रेस्क्यू ऑपरेशन किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पा रहा है।
सोमवार को एक बार फिर दिन भर कॉम्बिंग अभियान चलाकर खेतों से जंगल तक टीम खाक छानती रही। देर शाम तक बाघ का कुछ पता नहीं चल सका। बाघ लगातार ठिकाना जरूर बदल रहा है, लेकिन उसके पगचिह्न तीन किलोमीटर के दायरे में ही पाए जा रहे हैं।
इसके बाद भी ट्रैप कैमरों और ड्रोन कैमरों से उसकी लोकेशन ट्रेस करने में विशेषज्ञ सफल नहीं हो पा रहे हैं।
मिश्रिख रेंज की टीमें आठ-आठ घंटे की शिफ्ट में कमांड सेंटर के माध्यम से हर गतिविधि पर नजर बनाए रखने का दावा कर रही हैं।