रेउसा (सीतापुर)। गांजर इलाके में बाढ़ और कटान का कहर थमनेे के साथ ही जिम्मेदारों की सक्रियता भी कम हो गई है। वह बाढ़ की आशंका को लेकर जान कर भी संजीदा नहीं है। यही वजह है कि समय रहते बाढ़ और कटान से बचाव के लिए बेहतर इंतजाम नहीं करने पर गुरुवार को बाढ़ पीड़ितों के सब्र का बांध टूट गया। उन्होंने जमकर प्रदर्शन किया। प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। बाढ़ पीड़ितों ने समय से काम कराने की मांग भी की है।
बैराजों से पानी नहीं छोड़े जाने से हाल फिलहाल गांजर की नदियां शांत हैं। इससे लोगों को भी बड़ी राहत है, लेकिन ये राहत लंबे समय तक नहीं रहने वाली है। वजह, बारिश का मौसम अभी बाकी है। इसी के साथ बाढ़ का सैलाब मुसीबतों का पहाड़ लेकर आएगा, लेकिन अभी बाढ़ और कटान नहीं होने से जिम्मेदारों के पास समय रहते बाढ़ के कहर से लोगों को बचाने के लिए इंतजाम करने का वक्त है, लेकिन इसके बाद भी काम ठप पड़ा है। पानी कम होने के बाद सिंचाई विभाग का काम ठप पड़ा है।
इलाके के फौजदारपुरवा, परमेश्वरपुरवा, चौकीपुरवा में कटान बचाव का चल रहा कार्य एक सप्ताह से बंद है। गुरुवार को फौजदारपुरवा के सतनाम, अनुज, शत्रोहन, जगदीश, रक्षाराम, सनेही, भिखारी, रिंकी ने घाघरा के गांव किनारे प्रदर्शन कर हंगामा किया और सिंचाई विभाग के जिम्मेदारों की ओर से बरती जा रही शिथिलता को लेकर नाराजगी जताई।
फौजदारपुरवा स्कूल में खड़ी हैं मशीनें
लोगों का कहना है कि एक सप्ताह से काम बंद है। अभी काम पूरा करने का समय है। अभी कुछ दिन बाद बाढ़ का कहर शुरू हो जाएगा तो काम नहीं हो पाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि नदी का जलस्तर काफी कम है। अगर समय से काम शुरू किया जाए तो गांव के जो घर बचे हैं, उन्हें बचाया जा सकता है।
मशीनें फौजदार पुरवा स्कूल में खड़ी हैं। तहसीलदार अविचल प्रताप सिंह ने बताया कि पानी बैराजों से भी कम हो गया। नदियों का जलस्तर काफी नीचे चला गया है। हालांकि, बाढ़ का खतरा अभी टला नही हैं। एहतियात बरती जा रही। सिंचाई विभाग को इस वक्त कार्य में तेजी लाने की बात कही गई।