सीतापुर। शहर में यातायात विभाग लगातार चालान करने की कार्रवाई कर रहा है। लोगों को फूल देकर जागरूक भी किया जा रहा है। लेकिन जिम्मेदारों की नजर हाईवे के किनारे खड़े भारी वाहनों पर नहीं पड़ रही है जो आधी सड़क को घेर कर खडे़ होते हैं और हादसे का सबब बनते हैं। अक्सर इनसे टकराकर कई वाहन क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। वाहन में सवार लोगों की मौत तक हो जाती है।
हाल ही में जिले हुए एक हादसे में एक कार सड़क किनारे खड़े एक वाहन से टकरा गई थी। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद भी जिम्मेदारों का इस ओर ध्यान नहीं गया है। शहर के कांशीराम के लगाकर खैराबाद टोल तक आपको कई ऐसे भारी वाहन, ट्रक, टैंकर, डीसीएम आदि सड़क पर खडे़ मिल जाएंगे, जिनकी वजह से आधा मार्ग अवरुद्ध हुआ पड़ा है। जबकि सीएम ने साफ निर्देश दिए हैं कि हाईवे के किनारे सड़क पर ऐसे वाहन बिल्कुल न खड़े हो। इसके बाद भी जिम्मेदारों का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है।
शनिवार को कई स्थानों पर देखने को मिला कि कई ट्रकें सड़क पर खड़ी हुई थी। जिससे हाईवे पर दौड़ रहे वाहनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा रहा था। नवीन चौक से वैदेही वाटिका तक कई ऐसे ट्रक थे जो मार्ग पर खडे़ थे। यही आलम वैदेही वाटिका से खैराबाद टोल तक भी था। खैराबाद में परिवहन विभाग का कार्यालय यातायात के जिम्मेदार अक्सर इन रास्तों से निकलते हैं लेकिन उनकी नजर इस ओर नहीं पड़ती है।
रात में और घातक साबित होते ऐसे वाहन
हाईवे किनारे ऐसे वाहन रात में और भी घातक हो जाते हैं। ज्यादातर वाहनों में रिफ्लेक्टर नहीं लगे होते हैं। अक्सर देखा भी यही जाता है कि रात में ऐसे हालात बन जाते है कि रिफ्लेक्टर न होने की वजह से सड़क पर खडे़ वाहन दिखाई नहीं पड़ते। इधर तेज गति से आ रहा वाहन चालक जब तक कुछ समझ पाता है, तब तक हादसा हो जाता है।
ढाबों के पास नहीं पार्किंग की व्यवस्था
खैराबाद इलाके में स्थित कई ढाबे ऐसेे है, जो काफी कम जगह में बने हुए हैं। इनके बाहर वाहन खड़ा करने की बिल्कुल भी जगह नहीं है। ढाबा संचालक ट्रक चालकों के वाहन अपने ढाबे के बाहर खड़ा करवा देते हैं। चालकों को भी इसकी कोई परवाह नहीं है। वह मनमाने तरीके से ट्रक खड़ा कर देते है। जब भी कोई हादसा होता है तो ढाबा संचालक पर कोई भी कार्रवाई नहीं होती है।
लगातार चल रहा अभियान
ऐसे वाहनों का चालान काटने की कार्रवाई लगातार की जा रही है। जो भी वाहन इस तरह से हाइवे पर खड़े होते हैं, तो उनको चालान पहले भी काटा जा चुका है। अभियान आगे भी जारी रहेगा।
- उदित नारायण, एआरटीओ प्रर्वतन