इस जिले को महर्षि दधीचि की धरती कहा जाता है। जहां पर महर्षि दधीचि ने लोक कल्याण के लिए अपनी देह त्याग दी थी। उसी धरती पर नेत्रदानियों का कारवां आगे बढ़ चला है। जो लोगों की जिंदगी में खुशियों की सौगात लेकर आया है। करीब 230 ऐसे लोग हैं, जिनकी जिंदगी में नेत्रदानियों ने उजाला करने का काम किया है।
जिले में सक्षम नाम की एक संस्था है, जो नेत्रदान के लिए लोगों को प्रेरित करती है। यह संस्था लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करती है। इस संस्था के माध्यम से करीब 118 लोग नेत्रदान कर चुके हैं। जिनकी कार्निया को मरणोपरांत संस्था ने आंख अस्पताल में सुरक्षित कराया है।
संस्था के प्रवक्ता विकास अग्रवाल कहते हैं कि लोगों द्वारा दान की गई कार्नियां करीब 230 लोगों की जिंदगी में उजाला दे रही है। एक नियम के मुताबिक उन लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं किए जा सकते हैं, लेकिन नेत्रदानियों ने जो काम किया है, उससे 230 परिवारों में खुशियों का उजाला फैला है।
जिस परिवार के सदस्य को कार्नियां दान में लगाई गईं हैं, वह परिवार नेत्रदानियों व उनके परिवारों को दुआएं दे रहा है। जाने वाले तो चले गए, लेकिन जाते-जाते वे इतना अच्छा काम कर गए कि लोग आज उन्हें याद कर रहे हैं। वो तो चले गए, लेकिन उनकी आंखें आज भी दुनिया को देख रही हैं और किसी मजबूर का सहारा बनी हुई हैं।