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इलाज कराना महंगा, 10 फीसद बढ़े दवाओं के दाम

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सीतापुर। कोरोना काल के बाद कई आवश्यक दवाओं के रेट में इजाफा हो गया है। दवाओं के दाम में करीब 10 फीसद तक की बढ़ोतरी हुई है, इससे लोगों को अपना इलाज कराने के लिए जेब अधिक ढीली करनी पड़ रही है। इससे कई घरों का बजट बिगड़ गया है। हालांकि, इस बढ़ोतरी के पीछे जिम्मेदार अफसर नियमों का हवाला दे रहे हैं।
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कोरोना काल समाप्त होते ही जहां डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ने से महंगाई बढ़ गई, वहीं अब दवाओं के मूल्यों में भी इजाफा हो गया है। यह बढ़ोतरी प्रत्येक दवा पर करीब 10 फीसद तक हुई है। ज्यादातर उन दवाओं के दाम बढ़े हैं जिनकी इस समय अधिक डिमांड है। इस समय वायरल बुखार, डेंगू व मलेरिया का प्रकोप चल रही है। इन बीमारियों में उपयोग होने वाली दवाओं की बिक्री अधिक हो रही है।
वहीं, ठंडक में सांस व दिल के मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है। इससे इन बीमारियों में उपयोग होने वाली दवाओं की बिक्री भी बढ़ी है। हालांकि, जिले में दवाओं का कोई संकट नहीं है। पर्याप्त मात्रा में दवाओं का स्टॉक मौजूद है लेकिन मूल्य बढ़ोतरी से लोगों की जेब इलाज के नाम पर कुछ अधिक ही ढीली हो रही है।
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मुंशीगंज निवासी सूरज को सांस की बीमारी है। इनका लंबे समय से इलाज चल रहा है। सूरज का कहना है पहले सांस की दवा एक महीने की करीब एक हजार रुपये में मिल जाती थी। अब इसी दवा को खरीदने के लिए 1100 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। उनकी मां को दिल की बीमारी है। पहले मां की दवा पर एक माह में करीब दो हजार रुपये का खर्च आता था। अब यही दवा उन्हें करीब 2300 रुपये में मिल रही है। यानि सूरज पर अब प्रत्येक माह औसतन करीब 500 रुपये का अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
कोई भी दवा व्यापारी प्रिंट रेट से अधिक मूल्य पर दवाएं नहीं बेच सकता। कोई भी फॉर्मा एप के जरिए दवाओं का वास्तविक मूल्य जान सकता है। फॉर्मा एप पर दवाओं का नाम डालते ही उसके रेट खुद ही सामने आ जाएंगे। इससे किसी भी दवा का मूल्य मालूम किया जा सकता है। अगर कोई दुकानदार अधिक रेट लेने की कोशिश करता है तो उसकी ठगी आसानी से पकड़ी जा सकती है।
जिला औषधि निरीक्षक नवीन कुमार ने बताया कि दवाओं के रेट जीएसटी के अनुसार घटते-बढ़ते रहते हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार की पालिसी के तहत कंपनियां रेट बढ़ाती हैं। कोई भी व्यापारी प्रिंट रेट से अधिक मूल्य पर दवा नहीं बेच सकता है। अगर ऐसा करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होती है।
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