फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दूसरी बार जिपं अध्यक्ष की कुर्सी पर अनुसूचित जाति की महिला का होगा कब्जा

विज्ञापन
विज्ञापन
सीतापुर। शुक्रवार को शासन की ओर से जिला पंचायत अध्यक्ष पद के आरक्षण की जारी सूची में सीतापुर में यह कुर्सी अनुसूचित जाति (महिला) के लिए आरक्षित कर दी गई है। इससे पहले करीब 25 साल पूर्व इस वर्ग के लिए आरक्षित होने पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री रामलाल राही की पत्नी सुंदरी राही अध्यक्ष चुनी गई थीं।
विज्ञापन

जिला पंचायत अध्यक्ष पद का आरक्षण शुक्रवार को शासन ने जारी कर दिया। इस पद अनुसूचित जाति (महिला) के हिस्से में गया है। इसी के साथ राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस पद का दावेदार कौन होगा। अध्यक्ष के बीते पांच आरक्षण एवं कार्यकाल के अनुसार वर्ष 2015 में यह पद सामान्य वर्ग के लिए था। बिसवां के चर्चित पूर्व विधायक रामपाल यादव के बेटे जितेंद्र यादव अध्यक्ष रहे। वर्ष 2010 में सामान्य महिला के लिए आरक्षित था। तब बसपा के पूर्व काबीना मंत्री रामहेत भारती की पत्नी ऊषा भारती अध्यक्ष बनीं। इसके बाद इसी कार्यकाल में मधु गुप्ता अध्यक्ष पद पर आसीन हुईं। वर्ष 2005 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने पर वर्तमान भाजपा विधायक रामकृष्ण भार्गव के बेटे अजय भार्गव अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे।
वहीं, वर्ष 2000 में पिछड़ा वर्ग के लिए सीट आरक्षित थी, तब वर्तमान सपा विधायक नरेंद्र वर्मा के बड़े भाई महेंद्र सिंह वर्मा अध्यक्ष चुने गए थे। वर्ष 1995 में अनूसूचित जाति महिला का आरक्षण होने की वजह से केंद्रीय गृह राज्य मंत्री रामलाल राही की पत्नी सुंदरी राही अध्यक्ष पद पर आसीन हुई थीं। पांच कार्यकाल के बाद एक बार फिर यह पद अनुसूचित जाति (महिला) के लिए आरक्षित होने से इस वर्ग के राजनीतिक घरानों में खुशी की लहर है।
विज्ञापन

जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित होते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं और कयासों का दौर शुरू हो गया है। हर कोई मलाईदार सीट पर चुनाव लड़ने के लिए टिकट पाने को गोटी बिछाने में लग गया है। अब अपनी बिसात बिछाने में कौन कामयाब होता है, यह तो आने वाला वक्त ही तय करेगा।
जिला पंचायत की मलाईदार कुर्सी को हथियाने के लिए जिले के कई ऐसे लोग थे, जो जुगाड़ में लगे थे, लेकिन आरक्षण की सूची आने के बाद चुनाव लड़ने के अरमान आंसुओं में बह गए। चुनाव लड़ने के लिए कुछ लोग अंदरखाने ही तैयारी कर रहे थे, पर अब उनकी सभी तैयारी धरी की धरी रहने वाली है।
भाजपा में खींचतान मचना तय माना जा रहा है। दरअसल, इसमें तो कोई शक नहीं कि चुनाव हमेशा सत्ता पक्ष का ही होता है जो सत्ता में होता है, चुनावों में उसी का दबदबा होता है। भाजपा में मौजूदा दौर में कई ऐसे विधायक हैं जो इस वर्ग से आते हैं। ऐसे में ये माननीय इस कुर्सी पर अपने को बिठाने के लिए हर कोशिश करेंगे। लालसा सभी की होगी, लेकिन इसमें कामयाब कौन होगा, यह तो आने वाला समय ही तय करेेगा। इतना तो अभी से ही तय है कि पूरी ताकत लगाने से कोई पीछे नहीं हटेगा। ऐसे में पार्टी में खींचतान की नौबत आ सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें