इमलिया सुल्तानपुर (सीतापुर)। तेज आवाज के साथ अचानक पिंजरे का गेट बंद हो गया। उधर से गुजरे लोगों ने पिंजरा बंद देखा तो बाघ के कैद होने की चर्चा शुरू हो गई। हालांकि पिंजरे के करीब जाने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पाया। लोग बाघ के कैद होने की खुशी मनाने लगे। सूचना पर वन विभाग की टीम पहुंची। टीम ने पिंजरे में झांका तो उसमें बाघ की जगह कुत्ता कैद मिला। इसके बाद ग्रामीणों की खुशी काफूर हो गई। वन विभाग ने पिंजरे का गेट खोलकर कुत्ते काे बाहर किया।
दरअसल, तीन माह से इलाके में बाघ की चहलकदमी से कई गांवों में दहशत है। बाघ को पकड़ने के लिए विन विभाग की हर तरकीब अब तक बेनतीजा साबित हुई है। कई बार पिंजरे की जगह बदली गई, लेकिन बाघ उसमें कैद नहीं हुआ। इस समय बिशुनपुर के पास पिंजरा लगा है। बृहस्पतिवार को एकाएक तेज आवाज के साथ पिंजरे का गेट बंद हो गया।
खबर फैली कि पिंजरे का गेट बंद है और उसमें बाघ कैद हो गया है। इस पर वनकर्मी विनोद को सूचना दी गई। वनकर्मी जब पिंजरे के पास पहुंचे तो अंदर का नजारा देख मायूसी छा गई। दरअसल, पिंजरे के अंदर बाघ नहीं बल्कि कुत्ता था। शायद बकरी की आवाज सुनकर पिंजरे के अंदर घुस गया था, इसके बाद गेट बंद होने से कैद हो गया।
सीतापुर रेंजर सुयष श्रीवास्तव ने बताया कि पिंजरे के करीब लगे ट्रैप कैमरों को चेक किया गया। उसमें कुछ भी कैद नहीं हुआ है। नए पगचिह्न भी नहीं मिल रहे हैं। पिंजरे में कुत्ता फंसने जानकारी नहीं है। वैसे बकरी की आवाज सुनकर कोई भी जानवर पिंजरे में दाखिल हो सकता है।