पिसावां। गुरसंडा के मुख्य चौराहा स्थित महेश्वरनाथ मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को प्रवाचक मीनाक्षी तिवारी ने नर्मदा अवतार व नर्मदा चरित्र की भावपूर्ण कथा सुनाई। उन्होंने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश दिया।
कथा वाचिका ने बताया कि शास्त्रों में नर्मदा नदी को मोक्षदायिनी कहा गया है। मान्यता है कि गंगा में स्नान करने से पापों का नाश होता है, जबकि नर्मदा के केवल दर्शन मात्र से ही मनुष्य को पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है। उन्होंने नर्मदा की उत्पत्ति का वर्णन करते हुए कहा कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव जब सहस्रों वर्षों तक कठोर तपस्या में लीन थे, तब उनके शरीर से गिरी पसीने की बूंदों से नर्मदा का अवतार हुआ। इसी कारण नर्मदा को भगवान शिव की पुत्री और पवित्रता की प्रतीक माना जाता है। मीनाक्षी तिवारी ने कहा कि नर्मदा का उद्गम अमरकंटक से होता है और यह मध्य प्रदेश तथा गुजरात से होकर अरब सागर में मिलती है। स्कंद पुराण सहित अनेक धर्मग्रंथों में नर्मदा की महिमा का विस्तृत वर्णन मिलता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म, भक्ति, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। कथा के अंत में श्रद्धालुओं ने आरती में भाग लेकर सुख-समृद्धि की कामना की तथा प्रसाद ग्रहण किया।