सीतापुर। जिला विकास अधिकारी व प्रभारी डीसी मनरेगा हरिश्चंद्र प्रजापति के विरुद्ध गोंडा जिले में मनरेगा धनराशि के दुरुपयोग के आरोप में तीन एफआईआर दर्ज हैं। साथ ही वसूली का आदेश भी जारी है। वसूली के लिए वहां की डीएम ने सीतापुर के डीएम और सीडीओ को बीते साल दिसंबर माह में पत्र भेजा है। इसके बाद भी डीडीओ से वसूली नहीं हो सकी है और न ही उन्हें डीसी मनरेगा के पद से हटाया गया है। यह जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।
गोंडा जिले में तैनाती के दौरान डीडीओ हरिश्चंद्र प्रजापति पर तत्कालीन डीएम मार्कंडेय शाही ने साल 2021 में मनरेगा में भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर दो मुकदमे दर्ज कराए थे। साथ ही डीएम नेहा शर्मा ने बीते साल मनरेगा धनराशि के दुरुपयोग के आरोप में एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही रिकवरी आदेश जारी किया है। बीते साल तीन दिसंबर को सीतापुर के डीएम और सीडीओ को नौ लाख 78 हजार रुपये वसूलने के लिए पत्र भेजा है।
जानकार सूत्रों के मुताबिक मनरेगा धनराशि की वसूली नहीं हो सकी है और न ही डीसी मनरेगा पद से हटाया गया है, जबकि जिले में परियोजना निदेशक डीआरडीए और डीसी एनआरएलएम कार्यरत हैं। शासन के नियमों के मुताबिक मनरेगा सोशल ऑडिट और उपायुक्त श्रम रोजगार का कार्य एक ही अफसर नहीं कर सकता है।