अपराजिता के खेत में सीता देवी- संवाद
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सीतापुर। बिसवां ब्लॉक की ग्राम पंचायत भिनैनी की रहने वाली कृषि सखी सीता प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी हैं। उन्होंने अपने घर पर पोषण वाटिका विकसित कर विभिन्न प्रकार की पौष्टिक सब्जियों का उत्पादन शुरू किया है। उनके खेत में अपराजिता की फसल लहलहा रही है। साथ ही साथ ब्लू कॉर्न और कैमोमाइल की खेती अपनाकर नवाचार की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ाया है। इससे उन्हें आर्थिक लाभ हो रहा है।
कृषि विज्ञान केंद्र कटिया के मार्गदर्शन में सीता को प्राकृतिक खेती, पोषण वाटिका प्रबंधन और उन्नत फसल तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। यहां के वैज्ञानिकों के द्वारा समय-समय पर दी गई सलाह और प्रशिक्षण ने उनके कार्य को नई दिशा दी। सीता ने अपनी पोषण वाटिका में लौकी, तोरई, भिंडी, कद्दू एवं हरी पत्तेदार सब्जियों का उत्पादन सफलतापूर्वक किया जाता है। जिससे परिवार को ताजा और पौष्टिक भोजन मिलने लगा। इस समय उनके खेत में अपराजिता की पौध लगी है। इसमें फूल खिल रहे हैं। इनकी बिक्री वह एफपीओ पर करती हैं। इससे उन्हे परंपरागत फसलों से अधिक लाभ हो रहा है। साथ ही ब्लू कॉर्न और कैमोमाइल की खेती से उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त होती है।
गो आधारित प्राकृतिक खेती करने से लागत में कमी
देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से वे जीवामृत, बीजामृत और दशपर्णी अर्क तैयार कर रही हैं, जिससे उनकी खेती पूरी तरह रसायन मुक्त हो गई है और लागत में भी कमी आई है। सीता की इस पहल से न केवल उनका परिवार आत्मनिर्भर बना है बल्कि वे अपने क्लस्टर की अन्य महिलाओं और किसानों को भी प्राकृतिक खेती, पोषण वाटिका और अपराजिता अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। केवीके कटिया के अध्यक्ष डा. दया शंकर श्रीवास्तव ने बताया कि सीता का कार्य अन्य किसानों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल है। वह एक सफल कृषि सखी के रूप में पूरे क्षेत्र में बदलाव की मिसाल बन चुकी हैं।