योगीराज में लकड़ी के अवैध कारोबार पर अब शिकंजा कंसना शुरू हो गया है। गुरुवार को डीएम व एसपी ने लहरपुर में छापेमारी की। इस दौरान सड़क से लेकर खाली पड़े प्लाटों में अवैध लकड़ी के बोटे डंप मिले।
यह देख डीएम ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने अधीनस्थों को फटकार लगाते हुए कहा कि इतने बड़े पैमाने पर लकड़ी का कारोबार हो रहा है और जिम्मेदारों के पास कोई ब्यौरा क्यों नहीं है।
डीएम अमृत त्रिपाठी, एसपी सौमित्र यादव अन्य अधिकारियों के दल बल के साथ गुरुवार दोपहर लहरपुर कस्बा पहुंचे। यहां सड़क पर पड़े लकड़ी के बोटों देख वह बिफर गए। दोनों अधिकारियों ने लकड़ी स्वामियों का पता लगाना चाहा।
अधिकारी काफी देर तक खड़े रहे, लेकिन लकड़ियों के मालिक नहीं आए। डीएम ने कहा कि यदि लकड़ी के स्वामी सामने नहीं आ रहे हैं, तो इसका मतलब है, कि लकड़ी को अवैध तरीके से काटकर बाजार में लाया गया है।
इसी दौरान दोनों अधिकारी माजा शाह के निकट खाली पड़े प्लाट में पहुंचे। यहां प्लाट में भी काफी मात्रा में लकड़ी के बोटे पड़े थे। यहां भी लकड़ी का कोई स्वामी सामने नहीं आया। इस पर डीएम खासे नाराज हुए और उन्होंने कहा कि जिम्मेदार तय करें, कि इस तरह के बड़े पैमाने पर लकड़ी के कटान व कारोबार में जिम्मेदारी किसकी है।
उन्होंने डीएफओ राकेश चौधरी से कहा कि वे लकड़ी स्वामियों का पता लगवा कर संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराएं। वहीं एसडीएम रतीराम से कहा कि वे जांच करें, कि इतने बड़े पैमाने पर लकड़ी कटान व उसकी अवैध रूप से लग रही मंडी में जिम्मेदारी किसकी है। जो भी अधिकारी जिम्मेदार हो, उस पर कड़ी कार्रवाई की जाए। वनकर्मियों ने लकड़ियों को कब्जे में ले लिया है।